भारत बंद

ग्वालियर, मुरैना, भिंड में स्थिति तनावपूर्ण, जमकर हुई तोडफ़ोड़, एमपी और यूपी में भेजी गईं आरएएफ कंपनियां

  • सागर, बैतूल, सीहोर, विदिशा सहित अनेक जिले प्रभावित
  • मध्य प्रदेश में 6, यूपी में 2 राजस्थान में 1 की मौत

नवभारत टीम नई दिल्ली, ग्वालियर/ इंदौर/ भोपाल,

दलित संगठनों द्वारा सोमवार को बुलाए गए भारत बंद के दौरान भडक़ी हिंसा में मरनेवालों की संख्या बढक़र 9 हो गई है. अकेले मध्य प्रदेश में ही 6 लोगों की जान चली गई. उत्तर प्रदेश में 2 और राजस्थान में एक व्यक्ति की मौत हो गई है.

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और झारखंड के कई जिलों में बंद के दौरान भारी हिंसा हुई. इस दौरान न सिर्फ सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया बल्कि आम लोगों के वाहनों में भी तोडफ़ोड़ की गई. झड़प में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए हैं. देशभर में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है.

पंजाब में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गयी हैं. कई शहरों में रेल, सडक़ यातायात बंद और वाहनों को आग लगाने के समाचार भी मिलें हैं. राजस्थान में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयी हैं.

इस बीच, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के संबंध में हाल में आये फैसले के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय में समीक्षा याचिका दायर कर दी है. उन्होंने सभी पार्टियों, संगठनों और लोगों से ङ्क्षहसा नहीं भडक़ाने तथा शांति बनाये रखने की अपील की है.

इंदौर में भी प्रदर्शन: शहर में बंद समर्थकों ने बाइक पर मल्हारगंज, टोरी कार्नर, गोराकुंड, खजुरी बाजार और राजवाड़ा इलाके में लंबा जाम लग गया. यहां लोग कलेक्टर के दफ्तर पर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे हैं. आदिवासी सदस्यों ने सोमवार सुबह से पैदल व दोपहिया वाहनों से शहर का भ्रमण शुरू किया.

भिंड में ट्रेन रोकी: भिंड. ट्रेन को रोकने के लिए भीम सेना के लोगों ने पटरी पर डाला डेरा. प्रदर्शनकारियों ने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस रोकी. काफी समय तक ट्रेन यातायात बाधित रहा, बाद में इसे क्लियर किया गया. हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी ट्रेक पर जमा हो गए हैं. वहीं मेहगांव में पथराव, गोहद में फायरिंग की घटनाएं हुई हैं. गोहद में 3 लोगों घायल होने की सूचना है. वहीं मुरैना. दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर हिंसा हो रही है.

सतना में राष्ट्रीय राजमार्ग पर किया चक्काजाम: विरोध प्रदर्शन की आग में सतना भी कुछ हद तक झुलसा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित समाज सडक़ों पर उतर आया और राष्ट्रीय राजमार्ग सात पर चक्काजाम किया. जाम की वजह से सडक़ के दोनो और पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया. बंद कराने के दौरान शहर के पन्नीलाल चौक मे दो पक्षों मे हुई मारपीट भी हुई.

खंडवा में दुकानदारों से विवाद : खरगोन और मंडलेश्वर में भी रैली निकालकर, व्यापारियों से दुकानें बंद कराई गई. खंडवा में भी युवाओं ने दुकानें बंद कराने की कोशिश की, इस दौरान उनका दुकानदारों से विवाद हो गया. सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया.

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया साफ इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शनों में 9 लोगों की मौत के बावजूद स्ष्ट/स्ञ्ज (अत्याचार की रोकथाम) ऐक्ट पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है. दरअसल, केंद्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूर्व के स्टेटस को बहाल करने की मांग की, जिसके तहत एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कोई भी अपराध गैर-जमानती श्रेणी में माना जाएगा. मुताबिक चीफ जस्टिस ने अर्जेंट प्ली से इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया है.

यूपी और एमपी में भेजी गईं आरएएफ की कंपनियां

7 राज्य इन हिंसक प्रदर्शनों से प्रभावित हैं पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हालात काफी बिगड़ गए हैं. ऐसे में केंद्र सरकार ने दंगा रोकने के लिए विशेषतौर पर प्रशिक्षित रैपिड ऐक्शन फोर्स (क्र्रस्न) को इन दोनों राज्यों में रवाना किया है.

गृह मंत्रालय ने कहा है कि वह राज्यों के संपर्क में है और हालात से निपटने के लिए पूरी मदद की जा रही है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यूपी और एमपी में क्र्रस्न के 800 जवानों को भेजा गया है. क्र्रस्न की दो कंपनियां मेरठ और 1-1 कंपनियां आगरा व हापुड़ के लिए रवाना की गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिस पर हुआ विवाद 

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया है. इसके अलावा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में ऑटोमेटिक गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिनों के भीतर जांच करनी चाहिए और फिर आगे ऐक्शन लेना चाहिए.

यही नहीं, शीर्ष अदालत ने कहा है कि सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती है. गैरसरकारी कर्मी की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की मंजूरी जरूरी होगी. इस पर दलित समुदाय के लोग नाराज हो गए और सोमवार को भारत बंद बुलाया गया.

दर्जनों घायलों की स्थिति गंभीर

भारत बंद ने पूरे मध्यप्रदेश में हिंसक रूप ले लिया है. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे ज्यादा हिंसा हुई है. कई शहरों, नगरों में तोडफ़ोड़, आगजनी की घटनाएं हो रही हैं. जानकारी के मुताबिक इस हिंंसा में 6 लोगों के मारे जाने की सूचना है. ग्वालियर में 2 लोगों की मौत हुई है जबकि भिंड में भी दो और मुरैना में दो की मौत की सूचना है. दर्जनों घायलों में भी कुछ की स्थिति गंभीर बनी हुई है.

ग्वालियर के कई इलाकों में तोडफ़ोड़, पथराव, गोलीबारी और आगजनी की खबरें आ रही हैं वहीं भिंड में भीम सेना ने ट्रेन रोकने के लिए पटरी पर ही डेरा जमा लिया. बड़े पैमाने पर हो रही हिंसा के चलते ग्वालियर के मुरार, थाटीपुर, लहार, गोहद, मेहगांव सहित कई स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया गया है.

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