नवभारत न्यूज भोपाल,

राजधानी शैक्षणिक संस्थाओं का हब बन गई है. कॉलेजों व कोङ्क्षचग सेन्टरों की भारी तादात होने के कारण दूर-दराज के छात्र-छात्रायें पढऩे के लिये यहां का रुख कर रहे हैं. बाहर से पढऩे के लिये यहां आये छात्र-छात्राओं के लिये यहां कुकुरमुत्ते की तरह हॉस्टल खोले जा रहे हैं.

हॉस्टल मालिकों द्वारा युवाओं को तरह-तरह के प्रलोभन दिये जा रहे हैं. युवा रहने के लिये उन घरों में रहना पसंद कर रहे हैं जहां उन पर पाबंदी न हो. छात्रों की इसी महत्वाकांक्षा के कारण शहर में घर हॉस्टलों में तब्दील होते जा रहे हैं.

घरों का एक हिस्सा छात्रों के लिये स्वतंत्र कमरों के रूप में बनाये जा रहे हैं, जहां छात्रों को रूम देकर मकान मालिक गाढ़ी कमाई उगाही कर रहे हैं और एक सीमित समय तक छात्र-छात्राओं के रहने से मकान पर कब्जे जैसी नौबत भी नहीं आती है.

बिना किसी अल्टीमेटम वह छात्रों को रूम खाली करने का दबाव बनाते हैं और छात्र मजबूरन नये कमरों को ढूंढऩे लग जाते हैं. यह एक गोरख धंधा बनता जा रहा है, जिसकी प्रशासन को सुध नहीं है.

दरअसल नगर निगम ने हॉस्टलों के संचालन के नियम 2006 में बनाये थे, जो राज्य शासन से पास न होने के कारण शहर में लागू नहीं हो पाये हैं. इसीलिये इन हॉस्टल संचालकों पर लगाम नहीं कसी जा रही है.

नियमों का अभाव

शहर में हॉस्टलों के संचालन के लिये नियमों के अभाव के कारण न ही अधिकतर हॉस्टलों में सीसीटीवी कैमरों एवं ट्रेंड गार्डों जैसे सेफ्टी मेंजर्स का प्रयोग किया जा रहा है न ही दो कमरेनुमा हॉस्टलों में छात्रों का वेरीफिकेशन पुलिस द्वारा कराया जा रहा है, जिसके कारण छात्रों के भेष में आपराधिक तत्वों को भी यहां शरण मिली हुई है और हॉस्टल संचालकों को गाढ़ी कमाई हो रही है.

नशे एवं अपराध का अड्डा –

छात्र-छात्रायें घर से दूर यहां इंडिपेंडेंट रूमों में रहना पसंद कर रहे हैं, जहां इनको रोक-टोक नहीं है. इसी कारण छात्र-छात्रायें नशे की लत के शिकार हो रहे हैं. इन बच्चों के कमरे खाली करने के बाद कार्टून भरकर शराब की बोतलें पाई जाती हैं.

अफीम और गांजे जैसे मादक पदार्थों का सेवन यहां युवक-युवतियां कर रहे हैं. नशे में यह अपराध कर रहे हैं. कोङ्क्षचग सेन्टरों के बाहर मारपीट, रात चलते व्यक्ति पर अड़ीबाजी जैसी वारदातें यहां हो रही हैं. यह हॉस्टल नशे और अपराध की पनाहगार बनते जा रहे हैं.

इस मुद्दे पर रहवासियों की राय

हॉस्टल मालिक बिना पूर्व सूचना के रूम खाली करने का बोल देते हैं. मजबूरन दूसरे हॉस्टल में महंगे दामों पर रहना पड़ता है. सौरभ कुमार
रहवासी सुभाष फाटक

हॉस्टलों में मन-माफिक किराया मांगा जाता है. शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के हॉस्टलों में तो किराये के नाम पर भारी राशि वसूली जा रही है. आयुष राय
रहवासी रचना नगर

किरायेदारों की सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा जाता है. घरों में मेस में खाने में गुणवत्ता नहीं होती है. पंखे एवं कमरे जर्जर होने की स्थिति में सुधार नहीं होता है.
रत्नेश उपमन्यु
रहवासी गौतम नगर

अपराधियों को इन हॉस्टलों में शरण प्राप्त होती है. इनका वेरीफिकेशन संचालकों द्वारा नहीं होने से वह यहां रहकर लोगों से अड़ीबाजी करते हैं.जिसके कारण रहवासियों को परेशान होना पड़ता है.
रूपेश शर्मा
रहवासी द्वारका नगर

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