tataमुंबई,   टाटा समूह के अध्यक्ष पद से अचानक हटाये जाने पर साइरस मिस्त्री ने अप्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा है कि यह कंपनी के बोर्ड का दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार श्री मिस्त्री ने सोमवार को बोर्ड के सदस्यों को ईमेल भेजकर कहा कि जिस तरीके से उन्हें बाहर किया जा रहा है उससे वह हैरान हैं और ऐसा करके बोर्ड ने कोई अच्छा काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद का बचाव करने का भी एक मौका नहीं दिया गया।

श्री मिस्त्री ने आगे कहा कि वह फिलहाल कोई कानूनी कदम नहीं उठाने जा रहे हैं। हालाँकि टाटा समूह ने श्री मिस्त्री के तरफ से कोई कानूनी चुनौती से निपटने के लिए पहले ही अदालत में कैवियेट दायर किया है।

टाटा समूह के नौ सदस्यीय बोर्ड में छह ने श्री मिस्त्री को हटाने के पक्ष में वोट किया था। दो सदस्य बैठक से अनुपस्थित रहे थे। नियमों के अनुसार श्री मिस्त्री इस मामले में वोट देने के अयोग्य थे। श्री मिस्त्री को हटाये जाने के बाद श्री रतन टाटा को चार महीनों के लिए समूह का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है।

श्री टाटा के कानूनी सलाहकार हरीश साल्वे ने एक समाचार चैनल को बताया कि श्री मिस्त्री को ब्रिटेन में इस्पात कारोबार समेत समूह की कुछ अन्य संपत्तियों को बेचने के निर्णय के कारण अध्यक्ष पद से हटाया गया है। उनके इन निर्णयों से बोर्ड में नाराजगी थी। बोर्ड का मानना था कि इनसे कंपनी की वैश्विक छवि खराब हुई है।

श्री मिस्त्री को हटाये जाने के संबंध में बोर्ड को कानूनी सलाह देने वाले मोहन परासरण ने इससे पहले कहा था कि श्री टाटा ने श्री मिस्त्री से मुलाकात कर उन्हें खुद ही पद छोड़ने की सलाह दी थी।

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