modi1नयी दिल्ली,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैव विविधता को अक्षुण्ण रखते हुए हरित एवं श्वेत क्रांति के बाद देश में नीली क्रांति का आगाज़ करने का अाज आह्वान किया। श्री मोदी ने यहां तीन दिवसीय ने अंतरराष्ट्रीय कृषि जैव विविधता कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा कि अपनी भौगोलिक विविधता और विभिन्न प्रकार के अलग-अलग जलवायु प्रक्षेत्राें की वजह से भारत जैव विविधता के मामले में बहुत समृद्ध राष्ट्र है।

पश्चिम में रेगिस्तान है तो उत्तर-पूर्व में दुनिया की सबसे ज्यादा नमी वाला हिस्सा है। उत्तर में हिमालय है तो दक्षिण में अथाह समुद्र है। उन्होंने कहा कि भारत में 47 हजार से ज्यादा पादप प्रजातियां पाई जाती हैं और जानवरों की 89 हजार से ज्यादा प्रजातियां हैं। भारत के पास 8100 किलोमीटर से ज्यादा का समुद्र तट है।

ये इस देश की अद्भुत क्षमता है कि सिर्फ ढाई फीसदी भूभाग होने के बावजूद, ये जमीन दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी, 18 प्रतिशत जीव जन्तु और साढ़े छह प्रतिशत जैव विविधता को यह अपने में संजोये हुए है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ने जा रही हैं। वर्तमान समय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए कृषि जैव विविधता पर चर्चा, उस पर शोध बहुत अहम है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में जैव विविधता को एक ताकत की तरह लेकर उस पर शोध करके उसकी ताकत का संवर्द्धन किया जाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि इस बारे में मंथन किया जाना चाहिए कि 24 साल पहले 1992 में बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी कन्वेन्शन के प्रस्तावों को स्वीकार किए जाने के बावजूद आज भी हर रोज 50 से 150 प्रजातियां खत्म हो रही हैं। आने वाले सालों में आठ में से एक पक्षी और एक चौथाई जानवरों के भी विलुप्त होने का खतरा है।

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