khannaनयी दिल्ली,  अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के अध्यक्ष अनिल खन्ना ने सरकार के साथ तनाव पूर्ण रिश्तों का हवाला देते हुये गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

खन्ना को गत तीन सितंबर को इंदौर में सम्पन्न संघ की बैठक में दूसरी बार अध्यक्ष पद के लिये चुना गया था लेकिन खन्ना ने सरकार के साथ अपने तनाव पूर्ण संबंधों का हवाला देते हुये कहा कि इससे खेल का नुकसान होगा और उन्होंने अपने पद को छोड़ने का निर्णय लिया है।

खन्ना और खेल मंत्रालय के बीच उस समय से मतभेद हैं जब खन्ना पहली बार 2012 में एआईटीए के अध्यक्ष बने थे।

खन्ना इससे पहले एआईटीए के दो बार महासचिव भी रह चुके थे।

सरकार का कहना था कि खन्ना ने कूलिंग ऑफ पीरियड का उल्लंघन किया था और उन्हें महासचिव पद पर काम करने के बाद अध्यक्ष चुना गया था।
खेल संहिता के अनुसार यदि कोई पदाधिकारी लगातार दो कार्यकाल के बाद फिर से किसी पद पर आसीन होना चाहता है तो उसे नियमानुसार पहले चार साल तक बाहर रहना होगा।

खन्ना ने कहा कि उनकी एआईटीए के अध्यक्ष पद पर बने रहने की कोई इच्छा नहीं है और उन्होंने संचालन परिषद के इस शीर्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है।

कार्यकारी समिति की अगली बैठक पांच नवंबर को होगी। उन्होंने कहा,“मेरी एआईटीए अध्यक्ष पद पर बने रहने की कोई इच्छा नहीं है। दिशानिर्देशों के कारण नहीं बल्कि मेरे व्यस्त कार्यक्रम के कारण। अगले चार साल में मुझे काफी यात्रा करनी है।

वह खेल संहिता को गलत तरीके से लागू करके और इसकी गलत व्याख्या करके मुझे हटा नहीं सकते।

इसके लिए एआईटीए अंत तक संघर्ष करेगा और कानूनी रास्ता हमेशा खुला रहेगा।

” उल्लेखनीय है कि खेल मंत्रालय ने मंगलवार को एक बार फिर नोटिस भेजकर एआईटीए की मान्यता रद्द करने की धमकी दी थी जिसके बाद खन्ना पर पद छोड़ने का दबाव था।

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