8 नवंबर की शाम के समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 500-1000 के नोट बंद होने की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य भारी मात्रा में काला धन रखे लोगों से धन निकलवाना है. इतने बड़े अभियान को बिना किसी खास तैयारी लागू कर देने से काला धन वाले तो नहीं लेकिन साधारण लोग बहुत हैरान परेशान हो रहे है.

कालाधन वाले बैंकों में आ नहीं रहे है. टी.वी. चैनलों पर भी दिखा दिया गया कि दिल्ली में ही रुपया एक्सचेंज करने वाले उनके संस्थानों में काला धन वालों से खुलेआम कह रहे है कि आपके पास जितना भी रुपया बड़े नोटों में है ले आओ वे उसके बदले विदेशी मुद्रा डालर, कनेडियन डालर, यूरो, दीनार की भी विदेशी मुद्रा देने को तैयार है.

विदेशी मुद्रा वे ही लोग ले रहे है जिनके विदेशी बैंकों में खाते है या कुछ दिनों बाद वे भारत में ही उसका एक्सचेंज पा सकते हैं.

दूसरी ओर सरकार ने अति उत्साह से आम जनता के लिये ऐसी सुविधाओं की घोषणा कर दी जो कही नजर ही नहीं आयी. घोषणा हो गयी कि 10 नवंबर को बैंक और पोस्ट आफिस सुबह 8 बजे से खुलकर रात 8 बजे तक लोगों को पुराने के बदले कुछ सीमा तक नये नोट देंगे. दिल्ली का सबसे बड़ा डाकघर जो गोलघर पोस्टआफिस कहलाता है वह सुबह 10 बजे तक नहीं खुला और खुलने पर यह कह दिया गया कि अभी नई करेन्सी नहीं आयी है.

कोई भी बैंक सुबह 8 बजे नहीं खुला. खुलने पर भारी भीड़ में टोकन बांट दिये और कहा कि 4 घंटे बाद आयें. कुछ रुपया बांटा और कह दिया कि जो नई करेंसी आयी थी वह खत्म हो गयी. अब दूसरे दिन आएं. इस आरोप प्रत्यारोप में यह यथार्थ भी लगता है कि बैंक में करेंसी आने से पहले रिश्वत और कमीशन का लेन-देन हो गया और काफी रुपया ऊपर ही बंट गया. ऐसा रुपया पाने वाले निश्चित ही बड़ी रकम और काले धन वाले होंगे.

8 नवम्बर की रात को नेशनल हाइवे के टोल टैक्स नाकों पर कारों का जाम लग गया. जहां बड़े नोट ले नहीं रहे थे. दूसरे दिन सरकारी घोषणा की गयी कि अगले दो दिन हाईवे टोलटैक्स से मुक्त किया जाता है. ऐसे मौकों पर बैंक और पोस्ट ऑफिस पर सभी जगह यह गंभीर आरोप लग रहे हैं कि रुपया आम जनता को नहीं बल्कि बड़े और काले धन वालों के पास जा रहा है.

सरकार ने हमला काले धन वालों पर किया है और हमला आम जनता पर हो गया. बड़े शहरों में कई लोग आसपास से इलाज के लिये आये हुए हैं उनके पास बड़े नोट हैं और वे परदेस में सरकारी बदइंतजामी में हाल-बेहाल हो गये. शहरों में लोग होटलों में खाने-पीने को तरस गये. बाजार में जरूरी खरीद बिक्री न होने से आम आदमी और दुकानदार तक त्रस्त हो गये. कुछ दुकानदार बड़े नोट लेने को तैयार हैं वे जानते हैं कि इन्हें बाद में नये नोटों से बदला जा सकता है.

लेकिन उनके पास ग्राहक को बाकी रुपया लौटाने के लिये छोटे नोट नहीं बचे. आम आदमी का जीवन और बाजार में गतिविधियां ठप्प हो गयी हैं. बदइंतजामी में लोग बहुत ही हैरान परेशान हैं. दूसरी ओर देश में बड़े व काले धन वालों को विदेशी मुद्रा देने का व्यापार बड़े भारी कट एवं कमीशन पर चल रहा है. सरकार की बदइंतजामी अक्षम्य है.

Related Posts: