भारत के तमाम बैंकों के ए.टी.एम. डेबिट कार्ड का डाटा चोरी हो गया है जिसे अब तक की सबसे बड़ी बैंकिंग असुरक्षा कहा गया है. अन्दाजा है कि देश में 32 लाख से ज्यादा इससे प्रभावित हुए हैं. बैंकों ने इस कार्डों का चलन (आपरेशन) रोक दिया है और ग्राहकों को उन्हें वापस करने का कहा गया है. इनके डाटा चीन तक पहुंच गये हैं और इनसे निकासी (ड्रा) भी हुए हैं. बैंक इनका मुआवजा देने पर भी विचार कर रहे हैं.

ऐसा अनुमान हो रहा है कि हिताची पेमेन्टस सर्विस की मालवारे सिस्टम जो भारत के ‘यस बैंक’ को सेवाएं देता है उसके जरिये डाटा चोरी होने की शुरुआत हुई जो भारत के सभी बैंकों पर फैल गई. सब बैंकों ने धड़ाधड़ अपने कार्डों का चलन रोक दिया. देश के 19 बड़े बैंकों के 65 लाख बैंक खाता पिछले कई महीनों से लुटते रहे और बैंकों का पूरा सिस्टम कुछ नहीं कर पाया. आम आदमी इस तरह की हैकिंग से बचने के लिए कुछ नहीं कर सकता. इसे सुरक्षित रखना बैंकिंग सिस्टम की जिम्मेवारी है- जिसमें वह पूरी और बुरी तरह असफल रहा. ए.टी.एम. डेबिट कार्ड का धोखाधड़ी (फ्राड) का मामला सबसे ज्यादा गंभीर मालूम हो रहा है.

लोगों को भारी परेशानी हो रही है. लोगों की गाढ़ी कमाई लूट गयी. वे अपने जरूरी काम तक धनाभाव में नहीं कर पा रहे हैं. व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है.
लोगों को फौरन अपने बैंक खाते और उसमें हुए लेन-देन को जांच कर यह पता करे कि कहीं वे तो नहीं लुट गये और अपने बैंक व पुलिस में कार्यवाही करे. पिन नंबर बदल लें और ए.टी.एम. इस्तेमाल में कैंसिल बटन जरूर दवाएं.

डेबिट कार्ड और ए.टी.एम. को जितना सुविधाजनक बैंकों ने प्रचारित किया वह उससे ज्यादा असुरक्षित लग रहा है. बैंक के नाम से फोन कर लोगों से ‘पासवर्डÓ पूछकर कार्ड की क्लोनिंग कर लेते हैं. पूरा ए.टी.एम. तक उखाड़ के अपराधी ले जा चुके हैं. ए.टी.एम. में नकली नोट निकलते है और यह सामने आ चुका है कि जिस कंपनी को ए.टी.एम. के रुपया डालने का ठेका दिया है. उसी के लोग कम रुपया डालते है, नकली नोट डालते है और इसमें बैंक कर्मी भी लिप्त पाये गये है. लोग भी पूरी तरह सिस्टम को समझ नहीं पाये. फोन पर बैंक के नाम से पासवर्ड बता देते हैं. ये मशीन में केंसिल बटन नहीं दबाते है. कुछ अपराधी वहां खड़े रहते है.

मशीन में माचिस की तीली फंसा कर किसी ग्राहक का रुपया उसके जाने के बाद निकाल लेते है. अपराधी गैंगों के पास इसकी पूरी तकनीकी जानकारी हो गयी है कि एम.टी.एम. में फ्राड कैसे किया जा सकता है. भारत में इस समय 60 करोड़ डेबिट कार्ड हैं. इस डाटा चोरी से पूरा वित्तीय लेन-देन अस्त व्यस्त और ध्वस्त हो गया है.

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