इजराइल के राष्ट्रपति रियूवेन रिवलिन पहली बार भारत के तीन दिन के दौरे पर आये हुए हैं और दोनों के बीच रक्षा, सुरक्षा, कृषि और आतंकवाद से संघर्ष में गहरे व आत्मीय संबंधों में कई करार हुए.

इजराइल वह राष्ट्र है जो अपने 1948 में आये अस्तित्व के दिन से लगातार फिलीस्तीनों का आतंकवाद और उनके समर्थक अरब राष्ट्रों के साथ युद्ध करता रहा है. इजराइल ने इस संघर्ष में आतंक व युद्ध में महारत हासिल कर ली. उसके अस्तित्व को नकारने वाले 6 अरब राष्टï्रों ने उस पर संयुक्त हमला किया और पराजय पायी. उसने युगान्डा में बंधक बनाये गये अपने देशवासियों को एटेेन्बी में जिस तरह वायुसेना से सर्जीकल आपरेशन कराकर छुड़ाया वह सारी दुनिया में आज तक बेमिसाल है. एक दिन वह भी आया कि उसे नकारने वाले अरब राष्टï्रों ने उसे राष्ट्र की मान्यता देनी पड़ी और उसके प्रबल शत्रु यासिर अराफात को इजराइली प्रधानमंत्री से हाथ मिलाने पड़े.

श्री रियूवेन के दौरे के समय भारत के साथ मिलकर दोनों देशों ने आतंक के विरुद्ध विश्व स्तर पर संघर्ष करने का संकल्प लिया है. दोनों देशों ने रक्षा के क्षेत्र में भी अपने संबंध और गहरे व सघन किये हैं. दोनों देशों ने कृषि व पानी के क्षेत्र में भी करार किये हैं. इजराइल प्रारंभ में एक रेगिस्तानी देश था. लेकिन इजराइल ने रेत पर मिट्टïी की परतें चढ़ाकर और ग्रीन हाऊस खेती से उसे कृषि में उन्नत राष्ट्र बना दिया. समुद्र किनारे बसे इस राष्ट्र ने समुद्र के खारे पानी को वैज्ञानिक तरीके से खारे पानी से मीठा पानी (डीसेलीनेशन) कर पीने और खेतों की सिंचाई के लिए मीठा पानी प्राप्त कर लिया.

भारत के तीन तरफ 7500 किलोमीटर की समुद्री सीमा है, यहां राजस्थान व गुजरात के इलाके में रेत के रेगिस्तान भी हैं. भारत इजराइल से पानी और कृषि के क्षेत्र में उसके ज्ञान-विज्ञान में सहयोग कर रहा है. यहां के रेगिस्तान में भी खेती और समुद्र तटीय इलाकों में डीसेलीनेशन पद्धति से मीठा पानी भी पाया जा सकता है.

श्री रिवलिन ने कहा कि वे इजराइल में श्री नरेन्द्र मोदी के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. दोनों देश आतंकवाद का शिकार हैं और दोनों मिलकर इसे नेस्तनाबूद करने के लिए एक है. इस दौरे में शिक्षा व अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनों देशों में करार
हुए हैं.

अब से एक साल पहले भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी इजराइल की शासकीय यात्रा पर गये थे और उसी समय श्री रिवलिन को भारत आने का न्यौता दिया था. अब श्री नरेन्द्र मोदी भी कुछ ही समय में इजराइल की यात्रा पर जाने वाले हैं. भारत ने काफी समय तक अरब राष्ट्र के पेट्रो क्रूड पाने के दबाव में इजराइल से राजदूत स्तर के संबंध स्थापित नहीं किये थे- दोनों देशों में कान्सुलर श्रेणी के राजनैतिक संबंध रहे, लेकिन 25 वर्ष पूर्व 1981 में पूरे राजनैतिक स्तर के संबंध कायम किये थे. इस साल उसके रजत जयन्ती वर्ष में राष्ट्रपति श्री रिवलिन भारत आये हुए हैं.

Related Posts: