modi4नयी दिल्ली,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उम्मीद जतायी कि भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में ‘मेक इन इंडिया’ महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा और कहा कि दोनों देश मिलकर 21 सदी की ‘ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था’ की परिभाषा गढ़ सकते हैं।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ भारत और ब्रिटेन के बीच यहाँ आयोजित पहले प्रौद्योगिकी सम्मेलन की सह अध्यक्षता करते हुये श्री मोदी ने कहा “आज दुनिया ऐसे मोड़ पर है जहाँ प्रौद्योगिकी का विकास बदलावकारी हो सकता है। भारत और ब्रिटेन के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे 21वीं सदी की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को परिभाषित करने के लिए मिलकर काम करें।”

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के सामने कई आर्थिक चुनौतियाँ हैं जिनका सीधा असर व्यापार एवं वाणिज्य पर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश अपनी वैज्ञानिक विशेषज्ञता तथा प्रौद्योगिकी के बल पर नये अवसर पैदा करने में कामयाब रहेंगे।

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय अवसरों के बारे में उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी तथा वित्तीय क्षेत्रों के मेक इन इंडिया भी इसमें महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा “हम द्विपक्षीय संबंधों में मेक इन इंडिया के महत्वपूर्ण क्षेत्र होने की उम्मीद करते हैं। इस कार्यक्रम के तहत अत्याधुनिक निर्माण एक विशिष्ट प्रयास है। ब्रिटेन रक्षा विनिर्माण, विमानन तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में हमारी उदार प्रत्यक्ष निवेश नीति का लाभ उठा सकता है।”

यूरोपीय संघ के बाहर के किसी देश की पहली द्विपक्षीय यात्रा पर आयी सुश्री मे का स्वागत करते हुये श्री प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भारत-ब्रिटेन संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जाहिर होती है। यह भारत के लिए गौरव का विषय है कि उन्होंने यूरोपीय संघ से बाहर पहले देश के रूप में भारत का चुना।

गौरतलब है कि ब्रिटेन ने हाल ही में यूरोपीय संघ से बाहर होने के पक्ष में मतदान किया है तथा वर्तमान में उस दिशा में वैधानिक प्रक्रिया जारी है। सुश्री मे तीन दिन की भारत यात्रा पर रविवार रात यहाँ आयी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हालाँकि, पिछले पाँच साल में दोनों देशों का व्यापार लगभग स्थिर है, लेकिन वे एक-दूसरे के यहाँ बड़े निवेशक हैं। भारत ब्रिटेन में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है जबकि जी20 देशों में ब्रिटेन का निवेश भारत में सर्वाधिक है।

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