modi1नयी दिल्ली,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 और 12 नवंबर को जापान की यात्रा पर जाने की संभावना है जिस दौरान उनकी जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ वार्षिक शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

सरकार की आज यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री मोदी 11 और 12 नवंबर को जापान की राजधानी टोक्यो जायेंगे। उनकी वहां जापान के सम्राट अकीहितो और प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मुलाकात होगी और वह श्री अाबे के साथ भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक में शिरकत करेंगे जिसमें आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री के रूप में श्री मोदी की यह दूसरी जापान यात्रा होगी। प्रधानमंत्री इससे पहले सितंबर 2014 में जापान गये थे और पिछले वर्ष दिसंबर में श्री आबे भारत की यात्रा पर आये थे।

श्री मोदी ने सितंबर 2014 में जापान के साथ भारत के संबंधों को विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के स्तर पर लाने का फैसला किया और पिछले वर्ष भारत प्रशांत क्षेत्र एवं विश्व में शांति एवं समृद्धि के एक विज़न पर मिलकर काम करने की योजना की घोषणा की थी। सूत्रों के अनुसार दाेनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग पर तकनीकी बातचीत हो रही है और उन्हें उम्मीद है कि श्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान इस बारे में कोई ठोस निर्णय सामने आ जायेगा। दोनों देशों के प्रधानमंत्री अपनी पिछली मुलाकात के दौरान समझौते को सैद्धांतिक सहमति दे चुके हैं।

सूत्रोें के अनुसार जापान, भारत को जल एवं हवा में चलने वाले एम्फिबियन विमान यूएस-2 की खरीद के सौदे को मंजूरी दे सकता है। सूत्रों के मुताबिक देश में एक समान कर प्रणाली की दिशा में एक मील का पत्थर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने का रास्ता साफ हाेने के बाद जापान भारत में बड़े निवेश की घोषणा कर सकता है। जापानी उद्योग जगत काफी समय से भारत में निवेश और

कारोबार को बढ़ाने के वास्ते एक समान कर प्रणाली की अपेक्षा व्यक्त कर रहा था। श्री मोदी की इस यात्रा के दौरान जापान के सहयोग से विकसित होने वाले दिल्ली-मुंबई आैद्योगिक गलियारे (डीएमआईसी) में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को लेकर भी जापान कोई अहम एलान कर सकता है। जापान के साथ परमाणु सहयोग करार पर बातचीत 2008 में अमेरिका के साथ ऐसा ही समझौता होने के बाद से ही चल रही है। उस समय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से भारत को रियायत मिली थी।

भारत- जापान असैन्य परमाणु ऊर्जा करार पर हस्ताक्षर होने के बाद उस पर जापान संसद दाइत से स्वीकृति हासिल करनी होगी जो आसान काम नहीं होगा। जापान के लोग परमाणु अप्रसार को लेकर बहुत ही संवेदनशील हैं। चूंकि जापान विश्व का ऐसा एकमात्र देश है जिसने परमाणु हमला झेला है इसलिये वह भारत से परमाणु तकनीक एवं ईंधन के अप्रसार को लेकर अतिरिक्त गारंटी चाहता है।

जापानी मीडिया के अनुसार जापान, भारत पर समझौते में एक ‘निष्क्रियन प्रावधान’ डालने पर जोर दे रहा है जिसमें कहा गया है कि अगर भारत परमाणु परीक्षण करता है तो फिर परमाणु करार स्थगित हो जायेगा। वैसे भारत, जापान की दो कंपनियों जीई-हिताची और तोशिबा की वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कंपनी को संयंत्र लगाने के लिये जमीन आवंटित कर चुका है।

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