• एक साल में तीसरी बार गए हड़ताल पर

कर्मचारियों ने किए अपने मोबाइल बंद

सीहोर/ बैतूल/ ग्वालियर/ विदिशा/ मंदसौर कुछ दिनों पहले ऑडिटर से हो रही परेशानी को लेकर १०८ एंबुलेंस के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। इस बार वेतन संबंधित समस्या को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल पर एक कर्मचारियों के कारण एंबुलेंस के पहिए थम गए।

प्रदेश व्यापी हड़ताल के अंतर्गत जिले में भी कर्मचारियों ने मोबाइल ही बंद कर लिए। जिससे घायलों और प्रसूताओं को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचना पड़ा। एक साल में १०८ के कर्मचारी जिले में तीसरी बार हड़ताल पर गए है। पहली बार अप्रैल २०१७ में विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी प्रदेशभर में हड़ताल पर थे।

अभी दस नवंबर को भी आडिटर से परेशान होने के बाद कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इस बार रविवार को डेढ़ माह से वेतन नहीं मिलने के अलावा अन्य समस्याओं को लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी।

घायल व प्रसूताएं १०८ पर फोन करते रहेें, जो भोपाल कॉल सेंटर पर पहुंचा। वहां उनकी सुनवाई तो हो गई, लेकिन कॉल सेंटर से जब संबंधित क्षेत्र के कर्मचारी के मोबाइल पर फोन लगाया तो मोबाइल बंद मिला। इसी तरह की स्थिति सभी कर्मचारियों के मोबाइल की थीं। सुबह से ही कर्मचारियों ने सरकारी नंबर ही बंद कर दिए।

घायलों और प्रसूताओं को लाने ले जाने के लिए १०० डॉयल ने भी काफी हद तक अपनी भूमिका निभाई, लेकिन यह सेवा १०८ एंबुलेंस की सुविधा को पूरी करने में नाकाम रही। निजी वाहनों से लोग अस्पताल पहुंचने को मजबूर हुए। इधर एंबुलेंस के अचानक हड़ताल पर चले जाने से जिला प्रशसान भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पाया।

सीएमएचओ कंपनी से चर्चा कर व स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराकर निराकरण के लिए प्रयास करते रहें। कर्मचारियों की मंग है कि उन्हें हर माह समय पर वेतन दिया जाए। आठ घंटे से अधिक काम पर ओवर टॉइम दिया जाए। एकसाल से कंपनी पीएफ काट रही है, लेकिन पीएफ नंबर अभी तक नहीं दिए गए है। पीएफ की राशि व खाता नंबर दिए जाने की मांग की गई।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले दो माह से वेतन नहंी मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई. कई बार अधिकारियों को वेतन के लिए अवगत कराया, लेकिन उनकी किसी नहीं सुनी जिसकी वजह से उन्हें हड़ताल पर जाने को मजबूर होना पड़ा.

बैतूल में 108 एम्बुलेंस सेवा के जिला अध्यक्ष कमलेश साहू ने बताया कि भोपाल में प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक होने वाली है. इसमें अगर उनकी मांगों को मान लिया जाता है तो वे काम पर लौट जाएगा अन्यथा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.

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