नई दिल्ली, 18 अप्रैल. सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद 12 राज्यों ने अपने यहां के कैदियों की लंबित दया याचिकाओं का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट में भेजा है. पश्चिम बंगाल में कोई दया याचिका लंबित नहीं है. हरियाणा में सिर्फ तीन याचिकाएं हैं, जिनमें एक महिला की है.

उत्तराखंड में राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दाखिल करने वाले सुंदर सिंह का मानसिक चिकित्सालय, वाराणसी में इलाज चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिकाओं का ब्योरा दाखिल न करने वाले राज्यों को 48 घंटे में ब्योरा भेजने की चेतावनी दी थी. इसके बाद 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की ओर से ब्योरा भेजा गया है. इनमें महाराष्ट्र, त्रिपुरा, गोवा, आंध्र प्रदेश, मेघालय, उत्तराखंड, तमिलनाडु, पंजाब, नगालैंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और दमन व दीव शामिल हैं. अन्य राज्य पहले ही ब्योरा दाखिल कर चुके हैं. पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि फिलहाल राज्य में मृत्युदंड की सजा पाए दोषियों की याचिकाएं या तो हाई कोर्ट में लंबित हैं या फिर सुप्रीम कोर्ट में ही अभी विचाराधीन हैं, राज्यपाल के समक्ष कोई याचिका लंबित नहीं है. हरियाणा में तीन दोषियों की याचिकाएं राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास लंबित हैं.

इनमें से धर्मपाल सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति के पास नवंबर, 1999 से लंबित है जबकि संजीव और सोनिया की दया याचिकाएं जनवरी, 2008 से. संजीव और सोनिया पति-पत्नी हैं. उत्तराखंड का कहना है कि उसके राज्य के सिर्फ दो ऐसे कैदी हैं जिन्हें मौत की सजा दी गई है. इनमें से एक कैदी ओमप्रकाश उर्फ इजराइल है जिसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है लेकिन यह कैदी वर्ष 2003 से उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला कारागार में बंद है. राज्य के दूसरे कैदी सुंदर सिंह की दया याचिका अक्टूबर, 2010 से राज्यपाल के पास लंबित है.

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