मध्यप्रदेश में भाजपा की श्री शिवराज सिंह सरकार ने यह महत्वाकांक्षी संकल्प लिया है कि राज्य की 12वीं पंचवर्षीय में विकास दर को भी बढ़ाकर 12 प्रतिशत प्राप्त किया जायेगा. वर्तमान में चल रही 11वीं पंचवर्षीय योजना में मध्यप्रदेश को 7.6 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य दिया गया था. देश में जबकि विकास दर 9 प्रतिशत से घटकर 8.6 प्रतिशत तक पहुंच गई, मध्यप्रदेश में लक्ष्य से कहीं ज्यादा बढ़कर 10.06 प्रतिशत हो गई. राज्य में कृषि, उद्योग व अन्य क्षेत्रों ने विकास की गति को काफी बढ़ाया है. लेकिन इनमें सबसे ज्यादा योगदान कृषि क्षेत्र का रहा है. राज्य में लगभग सभी रबी और खरीफ फसलें बम्पर आ रही हैं. सम्पूर्ण भारत में कृषि की विकास दर 3 प्रतिशत के आसपास
ही रही.

मध्यप्रदेश ने देश में सर्वाधिक 9 प्रतिशत कृषि विकास दर प्राप्त की है. राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में भी सवा ग्यारह प्रतिशत विकास हुआ है. अब आगे मध्यप्रदेश विकास दर को बढ़ाकर 12 प्रतिशत तक ले जाना चाहता है. इसके लिए यह जोरदार प्रयास किये जा रहे हैं कि कृषि को 2013 तक उसकी जरूरत की पूरी बिजली मिले. मध्यप्रदेश को कृषि में सबसे ज्यादा उलझन इस बात पर आ रही है कि उसके औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक खाद के इतने कारखाने व उत्पादन नहीं हैं जो राज्य की इस जरूरत को पूरा कर सके. राज्य में खाद की कमी इतनी ज्यादा हो जाती है कि किसानों पर खाद की राशनिंग लागू करनी पड़ती है.

राज्य में औद्योगिक निवेश में विद्युत परियोजनाओं को महत्व दिया गया है. इसके साथ ही अब राज्य सरकार को इस पर केन्द्रित हो जाना चाहिए कि राज्य में रासायनिक खाद के इतने कारखाने लग जायें कि राज्य उसमें आत्मनिर्भर हो जाए. केन्द्र सरकार को भी मध्यप्रदेश की स्थिति को ध्यान रखना चाहिए कि यहां सामान्य विकास दर और खासकर कृषि विकास दर देश में सर्वाधिक है. राज्य में औद्योगिक निवेश के लिये 4,25,000 करोड़ रुपयों के करार हुए हैं. इनमें से 26,000 करोड़ रुपयों के उद्योगों ने उत्पादन भी शुरु कर दिया. कुछ बहुत बड़े प्रोजेक्ट निर्माण अवस्था में आ गये हैं. 25 करोड़ रुपयों के ऊपर के निवेश को मेगा प्रोजेक्ट का दर्जा देकर उनके लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया जा रहा है.

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