deepaनई दिल्ली,  भारत की ओर से 52 वर्षों के बाद ओलंपिक खेलों के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली और एकमात्र महिला कलात्मक जिमनास्ट दीपा करमाकर अगस्त में शुरू होने जा रहे खेलों के महाकुंभ में इस स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली अकेली भारतीय होंगी और उनके कंधों पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिये 125 करोड़ देशवासियों की उम्मीदों का भार रहेगा.

दीपा करमाकर ने अप्रैल महीने में ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया था और वह इन खेलों का टिकट पाने वाली देश की पहली महिला जिमनास्ट हैं वहीं वर्ष 1964 के बाद वह पहली भारतीय भी हैं जिन्होंने जिम्नास्टिक में ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया है.

दीपा ने अंतिम क्वालीफाइंग और परीक्षण टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर रियो ओलंपिक का टिकट कटाया था. इस 22 वर्षीय जिमनास्ट ने कुल 52.698 अंक बनाकर अगस्त में होने वाले ओलंपिक की कलात्मक (आर्टिस्टिक) जिमनास्टिक्स में जगह बनायी है. उन्होंने बीम और फ्लोर एक्सरसाइज में क्रमश: 13.366 और 12.566 अंक जुटाये थे.

देश को स्वंतत्रता मिलने के बाद से 11 भारतीय पुरुष जिमनास्ट ने ओलंपिक में शिरकत की थी जिसमें से दो ने 1952, तीन ने 1956 और छह ने 1964 में भाग लिया था. लेकिन दीपा ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट हैं. दीपा को रियो ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करने वाली महिला कलात्मक जिमनास्ट में व्यक्तिगत क्वालीफायर की सूची में 79वें स्थान पर रखा है. दशकों बाद ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रही दीपा का सफर काफी कांटों भरा रहा है. एक समय ऐसा भी था जब चपटे पैर के कारण उन्हें इस खेल का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा था, लेकिन दीपा ने अपने दृढ संकल्प से ओलंपिक तक का सफर तय किया. उन्होंने मात्र छह वर्ष की उम्र से ही जिमनास्ट का अभ्यास शुरू किया और अपने कोच कोच बिस्बेश्वर नंदी की मदद से चपटे पैर के बावजूद इस खेल में कामयाबी को छूआ.

दीपा ने एशियाई जिमनास्टिक चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और वह गत वर्ष विश्व कलात्मक जिमनास्टिक चैंपियनशिप में भी पांचवें स्थान पर रहीं और अपने इसी प्रदर्शन की बदौलत वह देश की सबसे सफल महिला जिमनास्ट भी बन गई हैं. दीपा के रियो में क्वालीफाई करने के बाद उनके कोच ने भी कहा था कि जब दीपा उनके पास आयी थीं तो उन्हें लगा था कि चपटे पैर होने के कारण वह जिमनास्ट नहीं बन सकेंगी क्योंकि इस खेल में एथलीटों को दौडऩे, भागने और उछलने में काफी लचीले पैरों की जरूरत होती है और सपाट पैरों के कारण जिमनास्ट को पैर जमाने में दिक्कत होगी. लेकिन दीपा ने अपनी मेहनत से शारीरिक परेशानियों पर भी जीत हासिल कर ली.

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