काबुल, 16 अप्रैल. अफगानिस्तान में काबुल व तीन अन्य शहरों में तालिबान आतंकवादियों के हमले व सुरक्षा बलों के साथ उनकी मुठभेड़ सोमवार को थम गई। इस संघर्ष में 36 आतंकवादियों सहित कम से कम 48 लोग मारे गए और 65 घायल हो गए। करीब 18 घंटे की सैन्य कार्रवाई में आतंकवादियों को मार गिराया जा सका।

गृह मंत्री बिस्मिल्ला मोहम्मदी ने कहा कि सरकारी इमारतों पर तालिबान आतंकवादियों के हमले में हमलावरों सहित 48 लोग मारे गए और 65 घायल हुए। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबित मोहम्मदी ने कहा कि आतंकवादी व आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में 36 आतंकवादी और आठ सुरक्षाकर्मियों व चार नागरिकों सहित 12 अन्य लोग मारे गए। उन्होंने कहा कि रविवार को 37 सशस्त्र आतंकवादियों ने आत्मघाती हमले व राइफलों और रॉकेट ग्रेनेडों से हमले किए। इसके बाद सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 36 आतंकवादी मारे गए जबकि एक को जीवित पकड़ लिया गया है।

आतंकवादियों ने रविवार को काबुल, नांगरहर की प्रांतीय राजधानी जलालाबाद, पकतिया की प्रांतीय राजधानी गरदेज व लोगार की प्रांतीय राजधानी पुल-ए-आलम में हमला किया था। जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। तालिबान ने कहा है कि ये हमले अफगानी व विदेशी सेनाओं के खिलाफ स्प्रिंग ऑफेन्सिव की शुरुआत के प्रतीक हैं। काबुल में सोमवार सुबह भी कई विस्फोट हुए। पुलिस ने बताया कि तालिबान आतंकवादियों पर काबू पा लिया गया है और सभी हमलावर मारे गए हैं। काबुल पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग के प्रमुख मोहम्मद जहीर ने कहा कि काबुल में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में आठ सुरक्षाकर्मी मारे गए.

और पांच नागरिकों सहित 46 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। आतंकवादियों ने आत्मघाती हमले व भारी गोलीबारी की। रविवार दोपहर 1.35 बजे हमलों की शुरुआत हुई और सोमवार सुबह 7.30 बजे तक ये जारी रहे। पुलिस की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि काबुल के दारुल अमन इलाके में सोमवार सुबह 7.30 बजे अंतिम बार आतंकवादियों ने हमला किया। कार्रवाई में सभी हमलावर मारे गए। गृह मंत्रालय ने कहा कि काबुल में मारे गए लोगों के सम्बंध में स्पष्ट रूप से कोई जानकारी नहीं है लेकिन नाटो नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं के सहयोग से अफगान सुरक्षा बलों ने बीते 24 घंटे में 47 तालिबानी आतंकवादियों को मार गिराया और 31 घायल हुए हैं। मंत्रालय से जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि नाटो के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं की मदद से नेशनल आर्मी सहित अफगान नेशनल पुलिस ने बीते 24 घंटों में काबुल सहित विभिन्न प्रांतों में 11 संयुक्त कार्रवाइयां की थीं। इस दौरान 47 आतंकवादी मारे गए, 31 जख्मी हुए और 21 को गिरफ्तार किया गया। बीते छह महीने से भी लम्बे समय में यह काबुल में हुआ पहला बड़ा बम हमला है। रविवार को हुए हमले काबुल के कड़ी सुरक्षा वाले इलाके में हुए, जहां लगातार विदेशी नागरिकों की आवाजाही रहती है। काबुल में इतने बड़े पैमाने पर पिछला हमला सितम्बर 2011 में हुआ था। तब सशस्त्र आतंकवादियों ने एक ऊंची इमारत पर कब्जा कर लिया था और अमेरिकी दूतावास व नाटो मुख्यालयों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में 14 अफगानी मारे गए थे।

‘काबुल हमले के लिए नाटो जिम्मेदार’

अफगान बलों द्वारा राजधानी पर तालिबानी आत्मघाती हमलों को नाकाम करने के कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति हामिद करजई ने इस घटना के लिए ‘खुफिया तंत्र की नाकामी’ को जिम्मेदार ठहराया, खासकर अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन को। करजई ने एक बयान में कहा, काबुल और अन्य प्रांतों में आतंकवादियों की घुसपैठ हमारे खुफिया तंत्र की नाकामी है, खासकर नाटो की और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। अफगान बलों द्वारा शहर पर फिर से पूरा नियंत्रण हासिल करने के बाद करजई का यह बयान आया है। तालिबान के इस हमले में 36 आतंकवादियों सहित 51 लोग मारे गये। राष्ट्रपति ने अपने सुरक्षा बलों की ‘बहादुरी’ की सराहना की। करजई ने कहा कि सुरक्षा बलों ने जल्दी और समय पर आतंकवादियों को जवाब दिया। उन्होंने कहा, अफगान सुरक्षा बलों ने लोगों को यह साबित किया कि वे अपने देश की सफलतापूर्वक सुरक्षा कर सकते हैं। करजई ने कहा कि काबुल और पडोस के अन्य प्रांतों पर हमलों में सुरक्षाबलों के 11 सदस्य शहीद हुए जबकि चार नागरिक भी मारे गये। इस घटना में 72 लोग घायल भी हुए हैं।

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