bpl3भोपाल,  मप्र की ग्राम पंचायतों पर तालाबंदी आंदोलन का आज 20वां दिन है. प्रदेश के 313 जनपद मुख्यालयों पर जारी धरना में प्रदेश भर के पंचायत सचिव, सहा. सचिव, मनरेगा कर्मचारी डटे हुए हैं कहीं जल सत्याग्रह, कहीं मुंडन तो कहीं भीख मांग कर सरकार की हठधर्मी रवैये का विरोध जारी है.

पूरे मप्र की 23 हजार ग्राम पंचायतों में जनता में हाहाकार है1 विकास कार्य 100 प्रतिशत ठप्प व मनरेगा पर विराम लग गया है. जनता में हाहाकार है लेकिन सरकार अभी तक नहीं जागी है. सचिव, सहायक सचिव, मनरेगा कर्मचारियों की साधारण मांगे नहीं मानने के कारण आंदोलन और तेज हो गया है.

मप्र पंचायत सचिव संगठन प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा, रोशन सिंह परमार ने बताया कि सरकार में अपने ही कर्मचारियों के प्रति कोई रहम नहीं है और अपने कर्मचारियों से बात करने में सरकार अपने आपको छोटा समझ रही है. सही मायने में जनता जो 52 हजार गांवों में रहती है, वह परेशान व त्रस्त है.

हम न सही उनकी खातिर भी सरकार को चर्चा के रासते खुले रखना चाहिए. हमारा लक्ष्य आंदोलन को लंबा खींचकर व्यवस्था प्रभावित करना नहीं था, लेकिन सरकार के अडिय़ल रवैये पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव की उदासीनता के चलते यह आंदोलन धीरे-धीरे जन आंदोलन में परिवर्तित होता दिख रहा है. हमारी मांगे हट कर नहीं है न ही सरकार के ऊपर भारी आर्थिक भार डालने वाली हैं.

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