नवभारत समाचार सेवा लखनऊ 30 सितंबर.. राजनाथ सिंह यूपी के दौरे पर हों और खासकर राजधानी लखनऊ में हों तो बगैर राजनीतिक चश्मे के वे कहां देख पाते हैं. मौका था रवीन्द्रालय में पार्टी की प्रदेश इकाई द्वारा आयोजित सामाजिक न्याय सम्मेलन का, जिसमें अच्छी खासी भीड़ जुटाई भी शायद इसलिए गई थी कि अतिपिछड़ों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का ट्रम्पकार्ड 2001 में मुख्यमंत्री रहते राजनाथ ने ही चलाई थी. वे बोलने के लिए जब उठे तो 2012 में 2001 की सरकार का अक्स देखने ही लग गए. परमात्मा से यह मुराद पूरी करने की प्रार्थना भी कर डाली.

चारबाग स्थित रवीन्द्रालय का पूरा परिसर खचाखच भरा था. लखनऊ में अर्से बाद भाजपाइयों की चहल-पहल देखी गई. पिछड़े वर्ग के कार्यकर्ताओं को लाने के लिए प्रदेश इकाई ने काफी कसरत कर रखी थी. प्रदेश नेतृत्व लगभग मंच पर तो मौजूद था ही दूसरे भाजपाई प्रदेशों के मंत्रियों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. मंच और पंडाल में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से गदगद राजनाथ कहां चुप बैठने वाले थे. आखिरकार उन्होंने कह ही डाला कि न सिर्फ पंडाल भरा-पूरा है बल्कि मंच भी भरा-पूरा दिखाई दे रहा है. ऐसी ही 2012 में बनने वाली भाजपा की सरकार भी भरी-पूरी दिखाई दे. परमात्मा से यही मेरी मुराद है। ठाकुर साहब ने जैसे ही अपने शब्दजाल से राजनीतिक माहौल बनाना शुरू किया तो सामने से बज रही तालियों ने उनका उत्साह दोगुना कर दिया. अब वे कहां रुकने वाले थे 2012 की सरकार बनाने में वे 2001 की सरकार का अक्स देखने लगे. अति दलितों व अति पिछड़ों को आरक्षण देने सम्बंधी सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट का मामला छेड़ दिया.

कहा मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी के नेता हुकुम सिंह के नेतृत्व में दो सदस्यीय समिति गठित इसलिए कर दी थी कि समाज के ऐसे वर्ग को आरक्षण का लाभ पहुंचाया जाये,जिन्हें अभी तक आगे बढऩे का मौका नहीं मिला है.

ऐसा मैने दैवीय सोच के आधार पर फैसला लिया था ताकि किसी के साथ अन्याय न हो. तब यही मुलायम सिंह यादव और मायावती ने इसका स्वागत नहीं किया था बल्कि स्वागत योग्य बताया था. सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट आने के बाद फौरी तौर पर 40 हजार लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया गया. यह कल्याण सिंह के आरोपों का असर था या फिर अपने राजनीतिक हुनर को पाक-साफ बताने की उनकी आदतन मंशा भले ही रही हो लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि समाज बनाने के वास्ते राजनीति करता हूं. जनता की आंख में धूल झोंक कर कभी राजनीति नहीं की.

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