मुंबई,

शेयर बाजार के लिए वर्ष 2017 शानदार रहा और इस दौरान बीएसई के सेंसेक्स में 30 प्रतिशत और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी में 31 फीसदी की बढोत्तरी दर्ज की गयी।साल के अंतिम सप्ताह में भी सेंसेक्स में 0.34 प्रतिशत की और निफ्टी में 0.36 प्रतिशत की तेजी रही।बीते वर्ष में सेंसेक्स ने 7285 अंकाें की छलांग लगयी और निफ्टी भी 2305 अंक की बढ़त हासिल करने में सफल रहा।

वैश्विक स्तर पर की भू राजनैँतिक अस्थिरता और आर्थिक शिथिलता के बीच मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों जैसे वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) दिवालियपन एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) और रियल्टी क्षेत्र के लिए रेरा आदि के बल पर शेयर बाजारों में यह तेजी रही।

जीएसटी के लागू किये जाने की शुरूआती महीने में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बना था लेकिन बाद में जीएसटी दरों के तर्कसंगत बनाये जाने और मांग आने से अर्थव्यवस्था को बल मिलने लगा है जिससे शेयर बाजार को भी गति देने का काम किया है।

इसके साथ ही देश के प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश , गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में केन्द्र में सत्तारूढ दल भारतीय जनता पार्टी को मिली जीत ने भी शेयर बाजार को गति देने का काम किया।

वर्ष 2017 के उत्तरार्ध में उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच जंग छिड़ने का बादल मंडराता रहा लेकिन वर्ष शांति पूर्ण तरीके से समाप्त हुआ।इन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का असर भी शेयर बाजारों पर पड़ा था।वर्ष 2017 में शेयर बाजार ने कई महत्वपूर्ण पराव पार किये।17 जनवरी को सेंसेक्स 27 हजार अंक के स्तर को पार किया।

इसके बाद दो फरवरी को यह 28 हजार के स्तर को पार कर गया।इसके बाद छह मार्च को यह 29 हजार के अंक के स्तर को पार किया और 26 अप्रैल को यह 30 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुये 30133 अंक पर पहुंच गया।इसी तरह 29 मई को सेंसेक्स 31 हजार के अंक को पार करते हुये 31309.28 अंक पर पहुंच गया तथा 31 जुलाई को यह 32 हजार के अंत को पार कर गया।

इसके बाद सेंसेक्स की तेजी पर थोड़ा ब्रेक लगा जिसके कारण इसको 33 हजार अंक के स्तर को पार करने के लिए अक्टूबर तक का इंतजार करना पड़ा।25 अक्टूबर कोयह 33 हजार के स्तर को पार करते हुये 33042.50 अंक पर रहा तथा वर्ष के समाप्त होने से पहले 26 दिसंबर को यह 34 हजार अंक के स्तर को पार कर गया और 34010 अंक पर पहुंच गया।

बीएसई की मझौली और छोटी कंपनियों का प्रदर्शन भी शानदार रहा।देशी और विदेशी दोनों निवेशकों ने मझौली और छोटी कंपनियों में निवेश किया जिसके बल पर मिडकैप में 52 प्रतिशत और स्मॉलकैप में 64 प्रतिशत की तेजी रही।

वर्ष 2017 में जहां सेंसेक्स और निफ्टी में 30 फीसदी और उससे अधिक की तेजी रही है वहीं वर्ष 2018 में भी इनमें 15 प्रतिशत के आसपास बढोत्तरी आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में सुधार और कारोबारी धारणा सुधने के साथ ही घरेलू स्तर पर मोदी सरकार के सुधार कार्यक्रमों के जारी रखने के बल पर शेयर बाजारों में तेजी का रूख बना रहेगा लेकिन इसकी गति कुछ कम हो सकती है।

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