नई दिल्ली, 25 अप्रैल. सरकार के कई मंत्रालय व विभाग संसद से मंजूर राशि से कहीं अधिक खर्च कर रहे हैं।

नियमों का उल्लंघन कर 21,703.12 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खजाने से निकालने को लेकर भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक [कैग] ने केंद्र के इन मंत्रालयों व विभागों को फटकार लगाई है। कैग के मुताबिक रेलवे व रक्षा मंत्रालय और डाक जैसे विभागों ने वित्त वर्ष 2010-11 में इस बढ़े हुए खर्च के लिए संसद की मंजूरी ही नहीं ली। संसद में मंगलवार को पेश कैग की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में रेलवे, डाक विभाग और रक्षा समेत कुछ अन्य सिविल मंत्रालयों व विभागों ने 11,043 करोड़ रुपये बिना संसद की अनुमति के सरकारी खजाने से लेकर खर्च कर डाले। संविधान की धारा 114 [3] साफ कहती है कि बिना संसद की मंजूरी लिए सरकारी खजाने से एक भी पैसा नहीं निकाला जा सकता। इस मामले में वित्त मंत्रालय का केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड [सीबीडीटी] भी पीछे नहीं है। विभाग ने साल 2010-11 में रिफंड पर ब्याज का भुगतान करने के लिए सरकारी खजाने से 10,499 करोड़ रुपये संसद की मंजूरी के बगैर खर्च कर डाले। कैग के मुताबिक विभाग ने ऐसा पहली बार नहीं किया है।

पिछले पांच साल में वो ब्याज भुगतान के लिए 37,365 करोड़ रुपये इसी तरह सरकारी खजाने से निकाल चुका है। कैग का कहना है कि सरकार ने कभी अपने बजट में ब्याज भुगतान का प्रावधान नहीं किया। वैसे, अपने जवाब में विभाग ने कहा है कि ब्याज का भुगतान वैधानिक जिम्मेदारी है। लिहाजा इसके लिए संसद की अनुमति आवश्यक नहीं है। कैग ने सीबीडीटी की इस दलील को पूरी तरह ठुकरा दिया है। उसका मानना है कि नियमों के मुताबिक ब्याज का भुगतान खर्च के मद में आता है। इसके लिए जरूरी राशि नियमों के मुताबिक ही ली जा सकती है।

Related Posts: