पेयजल के लिए 47 प्रतिशत परिवार हैंडपंप पर निर्भर

जनगणना निदेशक ने बुनियादी सुविधाओं से संबंधित आंकड़े जारी किए

भोपाल,9 अप्रैल,नभासं. देश के अग्रिम पंक्ति के राज्यों में शुमार होने की इच्छा रखने वाले मध्यप्रदेश में मात्र 23.3 प्रतिशत परिवार ही हैं.जिन्हें कि नल के जरिए पीने का पानी नसीब हो रहा है.

इसके अलावा पेयजल के लिए 47 प्रतिशत परिवारों को हैंडपंप पर 20 प्रतिशत परिवारों को कुओं पर और 7.6 परिवारों को नलकूप पर निर्भर रहना पडता है. इन तथ्यों का खुलासा जनगणना 2011 के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के संबंध में आज यहां राज्य के जनगणना निदेशक सचिन सिन्हा की ओर से जारी किए गए आकडों में हुआ है. आकडों के अनुसार नल के द्वारा पेयजल प्राप्त करने वाले परिवारों की संख्या में एक दशक के दौरान 26.5 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है. इसी तरह हैंडपंप की मदद से पेयजल की सुविधा हासिल करने वाले परिवारों में एक दशक में 64.6 प्रतिशत की और नलकूप के जरिए पेयजल हासिल करने वाले परिवारों में .64 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है.
हालाकि कुओं का इस्तेमाल करने वाले परिवारों की संख्या में 5.5 प्रतिशत की गिरावट आयी है. आकडों के अनुसार अन्य बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी अभी राज्य में बहुत कुछ किया जाना बाकी है.जबकि राज्य में 46 प्रतिशत परिवारों के पास टेलीफोन या मोबाइल फोन हैं. एक दशक में फोन का इस्तेमाल करने वाले परिवारों की संख्या में सबसे अधिक 920 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है.

ढकी नाली के माध्यम से गंदे पानी के निकास की सुविधा सिर्फ 9.8 परिवारों के पास उपलब्ध है. इस आकडें में दशक के दौरान 73.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुयी है. खुली नाली से गंदे पानी के निकास की सुविधा 30.1 प्रतिशत परिवारों को उपलब्ध है. राज्य में अभी भी 66.4 प्रतिशत परिवार खाना पकाने के लिए जलाऊ लकडी का इस्तेमाल करते हैं. खाना पकाने के लिए कैरोसीन का उपयोग करने वाले परिवारों की संख्या में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है. मौजूदा समय में मात्र 1.3 प्रतिशत परिवार ही कैरोसीन का उपयोग करते हैं. रसोईघर में एलपीजी का उपयोग 18.2 प्रतिशत परिवार करते हैं.

प्रकाश के स्त्रोत के रूप में 67 प्रतिशत परिवारों को बिजली की सुविधा है. एक दशक में इस आकडे में 31.4 प्रतिशत की बढोत्तरी हुयी है. रौशनी के लिए कैरोसीन उपयोग करने वाले परिवार 32 प्रतिशत हैं.एक दशक में इनकी संख्या में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है.
आकडों के अनुसार वर्ष 2001 में आवासीय इकाइयों की संख्या एक करोड 40 लाख थी जो वर्तमान में बढकर एक करोड 85 लाख हो गयी है. अच्छी श्रेणी के मकानों की संख्या 52.3 प्रतिशत रहने योग्य मकानों की संख्या 43.6 प्रतिशत और जीर्ण.शीर्ण मकानों की संख्या मात्र चार प्रतिशत है. मध्यप्रदेश में सात मई से 22 जून 2010 की अवधि में मकान सूचीकरण का काम किया गया था.

राज्य में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति

20 प्रतिशत परिवारों की  कुएं पर निर्भरता
एक दशक के दौरान 26.5 प्रतिशत की वृद्धि हुयी
बुनियादी सुविधाओं के मामले में भी अभी राज्य में बहुत कुछ किया जाना बाकी
कुओं का इस्तेमाल करने वाले परिवारों की संख्या में 5.5 प्रतिशत की गिरावट
राज्य में 46 प्रतिशत परिवारों के पास टेलीफोन या मोबाइल फोन
66.4 प्रतिशत परिवार खाना पकाने के लिए जलाऊ लकडी पर निर्भर
ढकी नाली के माध्यम से गंदे पानी के निकास की सुविधा सिर्फ 9.8 परिवारों के पास उपलब्ध है.
प्रकाश के स्त्रोत के रूप में 67 प्रतिशत परिवारों को बिजली की सुविधा है.

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