पहले वेस्ट इंडीज जीता, अब भारत, महाशतक के लिए सचिन को करना पड़ेगा इंतजार

नई दिल्ली 9 नवंबर. भारत ने वेस्टइंडीज को फीरोजशाह कोटला मैदान में बुधवार को पहले क्रिकेट टेस्ट में पांच विकेट से हराकर 23 साल पुराना बदला चुका लिया. भारत को 23 वर्ष पहले इसी मैदान पर कैरेबियाई टीम से पांच विकेट से ही हार का सामना करना पड़ा था.

वर्ष 1987-88 में दिलीप वेंगसरकर की कप्तानी में भारत ने इसी मैदान पर वेस्टइंडीज को 276 रन का लक्ष्य दिया था जिसे वेस्टइंडीज ने पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया था. उसके 23 साल बाद वेस्टइंडीज ने इस बार भारत के सामने 276 रन का वैसा ही लक्ष्य रखा जिसे महेन्द्र सिंह धौनी की टीम ने भी पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.  भारत की वेस्टइंडीज के खिलाफ 1948-49 से लेकर अब तक घरेलू जमीन पर 41 टेस्टों में कुल आठवीं और कोटला मैदान पर पहली जीत है. भारत की वेस्टइंडीज के खिलाफ अब तक कुल 86 टेस्टों में यह 13वीं जीत है. धौनी ने इस तरह अपनी कप्तानी में वेस्टइंडीज के खिलाफ यह दूसरी जीत हासिल की है. इससे पहले उन्होंने इसी वर्ष कैरेबियाई दौरे में एक टेस्ट जीता था. अपनी दूसरी जीत के साथ धौनी अब वेस्टइंडीज के खिलाफ सर्वाधिक दो टेस्ट जीतने वाले कप्तानों मंसूर अली खां पटौदी और सौरभ गांगुली की बरारबरी पर आ गए हैं. पटौदी ने 1974-75 की सीरीज में दो टेस्ट और गांगुली ने 2002-03 की सीरीज में दो टेस्ट जीते थे.

सचिन तेंदुलकर केवल 24 रन से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100वां शतक बनाने से चूक गए लेकिन उनकी रोमांचक अर्धशतकीय पारी से भारत ने बुधवार को पहले टेस्ट क्रिकेट मैच में वेस्टइंडीज को चौथे दिन ही पांच विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से बढ़त बनाई. अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे आर अश्विन को नौ विकेट लेने के लिए मैन आफ द मैच चुना गया.  वीवीएस लक्ष्मण ने भारत के लिए विजयी रन बनाया और 58 रन बनाकर नाबाद रहे. दर्शक भारत की जीत और तेंदुलकर के शतकों के शतक की दोहरी खुशी पाने के लिए फिरोजशाह कोटला के स्टेडियम में पहुंचे थे लेकिन यह स्टार बल्लेबाज 76 रन बनाकर आउट हो गया. भारत की जीत हालांकि तब तक सुनिश्चित हो गई थी. तेंदुलकर के अलावा मंगलवार को वीरेंद्र सहवाग (55) और बुधवार को वीवीएस लक्ष्मण (नाबाद 58) ने इसमें अपना योगदान दिया जिससे भारत चौथे दिन लंच के बाद 32वें मिनट में ही पांच विकेट पर 276 रन बनाकर इस मैदान पर सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल करने के रिकार्ड की बराबरी करने में सफल रहा. तेंदुलकर ने अपनी पारी में 148 गेंद खेली तथा दस चौके लगाए जबकि लक्ष्मण की 105 गेंद की पारी में छह चौके शामिल हैं.

भारत ने जब सुबह पारी आगे बढ़ाई तो उसे जीत के लिए 124 रन चाहिए थे. उसके दो ऐसे बल्लेबाज क्रीज पर मौजूद थे जिनके नाम पर कुल 27,864 रन दर्ज थे. डेरेन सैमी के पहले ओवर में गेंद तेंदुलकर के पैड से लगकर सीमा रेखा पार गई जबकि बाद में उनके बल्ले ने गेंद को बाउंड्री के दर्शन कराए. अगला ओवर करने फिदेल एडवर्ड्स आए जो मेडन रहा लेकिन इस तेज गेंदबाज के अगले ओवर की पहली गेंद ही राहुल द्रविड़ (31) के डिफेंस को तहस नहस कर गई. द्रविड़ 140 किमी की रफ्तार से मूव करती गेंद पर ड्राइव करने के लिए आगे आ गए लेकिन वह कुछ कर पाते इससे पहले ही गेंद उनके विकेट उखाड़ चुकी थी. वह अपने मंगलवार के स्कोर में केवल एक रन जोड़ पाए. लक्ष्मण ने पहली गेंद ही फ्लिक करके फाइन लेग पर चार रन के लिए भेजी जबकि सैमी के अगले ओवर में तेंदुलकर ने एक्स्ट्रा कवर और प्वाइंट के क्षेत्र से चौके जड़कर उनके महाशतक की उम्मीद में स्टेडियम में पहुंचे दर्शकों को रोमांचित कर दिया.  तेंदुलकर ने एडवर्ड्स की गेंद थर्डमैन पर खेलकर अपना 62वां टेस्ट अर्धशतक पूरा किया. अब उन्हें एलन बोर्डर के सर्वाधिक अर्धशतक के रिकार्ड की बराबरी के लिए केवल एक और पचासे की जरूरत है.

लक्ष्मण ने इस बीच कलाइयों की जादूगरी दिखाते हुए प्वाइंट और स्क्वायर लेग में चौके जमाए लेकिन हर कोई तेंदुलकर के बल्ले से रनों की बौछार देखना चाहते थे ताकि यहीं पर उनका महाशतक पूरा हो सके. मास्टर ब्लास्टर ने रवि रामपाल के अगले ओवर में दो चौके जड़कर उम्मीदों को पंख लगाने की पूरी कोशिश की. इसके बाद लक्ष्मण कुछ धीमे पड़ गए जबकि तेंदुलकर ने रामपाल, मर्लोन सैमुअल्स और देवेंद्र बिशू की गेंद को भी सीमा रेखा के दर्शन करवाए. लेकिन तभी बिशू की गुगली 15 हजार दर्शकों की आह निकाल गई. करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल तोडऩे वाले भारतीय मूल के बिशू भारत में अचानक ही खलनायक बन गए. उनकी यह गेंद विकेटों के आगे खड़े तेंदुलकर के पैड से टकराई और अंपायर राड टकर ने कुछ देर सोचने के बाद उंगली उठा दी. अभी तक तेंदुलकर के एक-एक रन पर उछल रहे दर्शक सन्न रह गए. लक्ष्मण ने इसके बाद सैमुअल्स पर एक रन लेकर टेस्ट क्रिकेट में 55वां और वेस्टइंडीज के खिलाफ 11वां अर्धशतक पूरा किया. भारत को जब जीत के लिए केवल एक रन चाहिए था तो युवराज सिंह (18) के पास विजयी रन बनाने का मौका था लेकिन सैमी ने उनके बल्ले और पैड के बीच से गेंद निकालकर विकेट उखाड़ दिए. महेंद्र सिंह धोनी सैमी ने बाकी बची चार गेंद सहजता से खेली. लक्ष्मण ने क्रेग ब्राथवेट के अगले ओवर में तीसरी गेंद पर स्क्वायर लेग पर एक रन लेकर टीम को जीत दिलाई.

दूसरी और चौथी पारी के बादशाह बने तेंदुलकर

रिकार्डों के बादशाह सचिन तेंदुलकर भले ही कोटला पर अपने शतकों का शतक पूरा ना कर पाए हों लेकिन अपनी अर्धशतकीय पारी के दौरान उन्होंने कई अन्य रिकार्ड भी अपने नाम किए जिनमें टीम की दूसरी पारी और मैच की चौथी पारी में सर्वाधिक रन बनाने का रिकार्ड भी शामिल है.  तेंदुलकर ने मंगलवार को ही अपना 15000वां टेस्ट रन भी पूरा किया था. उन्होंने बुधवार को अपनी पारी 33 रन से आगे बढ़ाई और इसमें चार रन जुड़ते ही वह टीम की दूसरी पारी में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए. इससे पहले यह रिकार्ड आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एलन बोर्डर के नाम पर था जिन्होंने 111 पारियों में 4371 रन बनाए हैं. दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कालिस 101 पारियों में 4357 रन बनाकर तेंदुलकर से ज्यादा पीछे नहीं हैं. तेंदुलकर दूसरी पारी में 121वीं बार बल्लेबाजी के लिए क्रीज पर उतरे थे. इसके कुछ देर बाद उन्होंने 70वां रन बनाते ही द्रविड़ के चौथी पारी में बनाए गए 1507 रन के रिकार्ड को भी पीछे छोड़ दिया. तेंदुलकर 62वीं बार चौथी पारी में बल्लेबाजी के लिए उतरे थे. उन्होंने इससे पहले अपना 62वां अर्धशतक पूरा किया और अब वह एलन बोर्डर के 63 अर्धशतक के टेस्ट रिकार्ड से केवल एक अर्धशतक दूर हैं.  वीवीएस लक्ष्मण ने भी इस बीच 30वां रन पूरा करके चौथी पारी में 1000 रन पूरे किए. यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह दुनिया के 20वें और भारत के चौथे बल्लेबाज बने. लक्ष्मण से पहले सुनील गावस्कर, तेंदुलकर और द्रविड़ यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं.

अश्विन को मिला शादी का खास तोहफा

कोटला में फतह के हीरो और मैन आफ द मैच रहे आर अश्विन अपने पदार्पण मैच में शानदार प्रदर्शन को अपनी शादी का तोहफा मान रहे हैं. वहीं कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जीत का श्रेय पूरी टीम को दिया. भारत ने फिरोजशाह कोटला में पांच विकेट से जीत दर्ज की और अश्विन ने दूसरी पारी में छह सहित कुल नौ विकेट चटकाकर मेजबान टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. अश्विन की 13 नवंबर को शादी होनी है और इस स्पिनर ने कहा कि उन्होंने इतने अच्छे पदार्पण की उम्मीद नहीं की थी. अश्विन ने मैच के बाद कहा, यह संतुष्ट करने वाला प्रयास है. मैंने कुछ विकेट हासिल करने की उम्मीद की थी लेकिन इतने विकेट नहीं. मुझे नहीं पता कि क्या यह शादी से पहले मेरे और मेरी पत्नी के लिए शादी का तोहफा है, लेकिन ऐसे प्रदर्शन के साथ शादी के लिए जाना काफी सुखद अहसास है. चेन्नई के इस गेंदबाज ने कहा कि साथी स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने दूसरे छोर से दबाव बनाया जिसका उन्हें फायदा मिला. उन्होंने कहा कि ओझा दूसरे छोर से काफी मेडन ओवर फेंक रहा था जिससे मदद मिली. बल्लेबाज को बैट-पैड आउट होने का डर नहीं था जो स्पिनरों के लिए सही नहीं है. भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि पहली पारी में 95 रन से पिछडऩे के बाद विकेट पर बल्लेबाजी करना आसान नहीं था और उन्होंने पिछडऩे के बाद वापसी करते हुए जीत दर्ज करने के लिए प्रत्येक खिलाड़ी के योगदान की तारीफ की.

उन्होंने कहा कि यह बड़ी बढ़त थी. हम सभी को लगता था कि हमने पहली पारी में उस तरह बल्लेबाजी नहीं की जिस तरह करनी चाहिए थी. लेकिन यह डर की तरह नहीं था. हमने कहा हमें इसकी भरपाई करनी होगी. ओझा ने पहली पारी में अच्छी गेंदबाजी की, अश्विन के पास कुछ विविधता है और अन्य गेंदबाजों ने उसका अच्छा साथ निभाया. धोनी ने कहा, हमें दोनों पारियों में अच्छी शुरुआत मिली और मध्यक्रम ने दूसरी पारी में अच्छा प्रदर्शन किया. यह रन बनाने के लिए आसान विकेट नहीं थी. आपको उस गेंद का ध्यान रखना था जो नीची रह रही थी. वेस्टइंडीज के कप्तान डेरेन सैमी कहा कि इस मैच में कुछ सकारात्मक पक्ष रहे और उनका मानना है कि वह सीरीज के बाकी मैचों में जीत दर्ज कर सकते हैं. उन्होंने कहा किजब आप शीर्ष टीम के खिलाफ खेलते हो तो आप जीत के लिए मौके बनाना चाहते हैं, हमने पहली पारी में ऐसा किया लेकिन दूसरी पारी में अच्छी बल्लेबाजी नहीं की और हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ी. तीसरे और चौथे दिन पिच थोड़ी आसान हो गई.

पदार्पण के साथ ‘मैन ऑफ द मैच’ पाने वाले तीसरे भारतीय

ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अपने पदार्पण टेस्ट में ‘मैन ऑफ द मैच’ पुरस्कार पाने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी बन गये हैं. अश्विन को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट में 128 रन पर कुल नौ विकेट लेने की बदौलत ‘मैन ऑफ द मैच’ घोषित किया गया. इससे पहले रुद्र प्रताप सिंह और प्रवीण आमरे ने पदार्पण टेस्ट में यह पुरस्कार जीता था. वर्ष 1990 से पहले यह पुरस्कार सभी मैचों में नहीं दिया जाता था वर्ना वेस्टइंडीज के खिलाफ ही अपने पदार्पण टेस्ट में 16 विकेट लेने वाले लेग स्पिनर नरेन्द्र हिरवानी यह पुरस्कार पा सकते थे.

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