नई दिल्ली, 2 जनवरी. शोरशराबे और विरोध की वजह से पिछले साल संसद के कामकाज के लिए तय 803 घंटों में से 258 घंटे बर्बाद हो गए. तीन सेशन में यह तय समय 73 दिन के बराबर था.

हालांकि कुल मिलाकर 2011 में 2010 की तुलना में ज्यादा काम हुआ. पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की एक स्टडी के मुताबिक, लोकसभा में हर रोज छह घंटे और राज्यसभा में पांच घंटे काम होता है. इसका मतलब है कि विधायी कामकाज के लिए लोकसभा के पास 438 घंटे और राज्यसभा के पास 365 घंटे हैं. लेकिन इस समय में से लोकसभा में लगभग 30 फीसदी टाइम और राज्यसभा में 35 फीसदी टाइम हंगामे की वजह से बेकार चला गया. इस साल महंगाई, करप्शन जैसे तमाम मुद्दों की वजह से बार-बार संसद की कार्रवाई रोकनी पड़ी. 2011 की सबसे अच्छी बात यह रही कि 2011 में संसद ने ज्यादा काम किया क्योंकि 2010 में पूरा एक सेशन ही बेकार चला गया था. 2011 में लोकसभा ने 70 फीसदी काम किया, जबकि 2010 में यह महज 57 फीसदी था. इस बार संसद के सामने 54 बिल रखे गए थे इनमें से 28 पास हुए. दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा में 18 फीसदी बिल पांच मिनट से भी कम समय में पास हो गए. इनमें प्रमुख थे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (संशोधन) बिल 2010, नैशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली लॉज (स्पेशल प्रॉविजंस)बिल 2011. फिलहाल इस समय संसद में 97 बिल लंबित हैं.

Related Posts: