सूखा राहत कार्य के नाम पर करोड़ों की हुई थी बंदरबांट

  • आरोपियों में तत्कालीन अधिकारी-ठेकेदार भी

नवभारत न्यूज शाजापुर,

सन 1986-87 और 1987-88 में सूखे की स्थिति को देखते हुए शाजापुर के तत्कालीन कलेक्टर ने किसानों और मजदूरों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से अविभाज्य शाजापुर जिले के विभिन्न स्थानों पर 5 करोड़ 88 लाख 99 हजार रुपए की लागत से 138 डेम बनवाए थे, लेकिन सिंचाई संभाग शाजापुर के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी, सहायक यंत्री, उपयंत्री और ठेकेदारों ने अपराधिक षडयंत्र रचकर भ्रष्टाचार करते हुए श्रम मूलक योजना अनुसार काम नहीं किया. जिस कारण सरकार को 1 करोड़ 42 लाख 3 हजार 411 रुपए 50 पैसे की हानि हुई थी.

मामले में ईओडब्ल्यू द्वारा जांच एवं अनुसंधान के बाद सन 1989 में अभियोग पत्र विशेष न्यायालय निवारण अधिनियम के समक्ष प्रस्तुत किया गया. जहां विशेष लोक अभियोजक सचिन रायकवार एवं उपसंचालक अभियोजन प्रेमलता सोलंकी के तर्कों से सहमत होते हुए विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) नीता गुप्ता द्वारा मंगलवार को प्रदेश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार में दोषी 42 आरोपियों को 2-2 साल के सश्रम कारावास और 89 लाख 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया.

29 साल बाद आए इस फैसले में यूं तो कुल 63 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन इनमें से 18 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 आरोपी अभी भी फरार हैं और 1 का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

जिन भ्रष्ट आरोपियों को दंडित किया गया है, उनमें आरएस हाड़ा, पीएल रावल, एएस ओबेरॉय, एसएन विजय, नंदलाल अग्रवाल, मोहनलाल जैन सभी अनुविभागीय अधिकारी/सहायक यंत्री सिंचाई संभाग शाजापुर, विलास पारुलकर, नंदकिशोर दधीच, दीपक एवले, अर्जुनसिंह सोलंकी, पंढरीनाथ भालसे, रमेशचंद गुर्जर, प्रफुल्ल कुमार दिशावल, जवाहरलाल गुप्ता, प्रभाकर पाद्ये, मोहम्मद शोएब खान, विनोद कुमार वर्मा, आफताब अहमद कुरेशी, लक्ष्मीनारायण तौर, देवीलाल गेहलोत, देवीलाल शर्मा, मोहम्मद इशहाक कुरैशी सभी उपयंत्री सिंचाई संभाग शाजापुर तथा उमेश जोशी इंदौर, हसन अली शाजापुर, दयालदास उज्जैन, सुशील कुमार जमदग्नि इंदौर, विकास मारवाह भोपाल, आशुतोष वैद्य इंदौर, अनिल कुमार परमार शाजापुर, ईश्वरदास उज्जैन, ललता नारायण प्रसाद परमार शाजापुर, श्रीमती कृष्णा त्रिपाठी उज्जैन, विश्वेश्वर नाथ, मांगीलाल दर्जी महिदपुर, हरिसिंह गोयल शाजापुर, राजेंद्र कुमार पाटनी इंदौर, सुधीर वर्मा इंदौर, प्रमोद कुमार पाठक उज्जैन, कमल सिंह ठाकुर इंदौर, आर कुमार इंदौर, रवि वाधवा शामिल हैं.

इन धाराओं में मिली सजा

इसी आधार पर समस्त आरोपियों को आपराधिक षडयंत्र के अपराध में धारा 120-बी भादवि के अंतर्गत दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500-500 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1947 की धारा 5 (1) डी सहपठित धारा 5 (2) के अंतर्गत सभी को दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं पृथक-पृथक तौर पर अर्थदंड से दंडित करते हुए 89 लाख 5 हजार रुपए का अर्थदंड दिया गया.

दैवेभो को बनाया ठेकेदार

कार्यपालन यंत्री आरएस अग्निहोत्री ने अपने पूर्व परिचित 20 ठेकेदारों को पंजीकरण के समस्त नियमों को नजरअंदाज करते हुए एक ठेकेदार मांगीलाल को जो उसी के कार्यालय में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी रहा को ठेकेदार के रूप में पंजीकृत कर दिया. इस प्रकार समस्त आरोपीगणों द्वारा षडयंत्रपूर्वक आपराधिक कृत्य करते हुए अपने-अपने पदों का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया गया.

1.42 करोड़ की राशि का अधिक भुगतान

भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा महंगे दाम पर सामग्री क्रय करने के मामले में जब भोपाल के मुख्य तकनीकी परीक्षक एसएस रघुवंशी द्वारा एनालिसिस किया गया, तो पता चला कि भ्रष्ट अधिकारियों ने कपटपूर्वक षडयंत्र रचकर स्टील शटर्स, एंंकर बार क्रय व शटर फिक्सिंग में 1 करोड़ 42 लाख 3 हजार 411 रुपए 50 पैसे का अधिक भुगतान कर अपने-अपने पदों का दुरुपयोग किया.

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