इलाहाबाद, 21 अक्टूबर. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत शुक्रवार को तीन गांवों में हुआ भूमि अधिग्रहण रद्द कर दिया, और इस मामले में हुई अनियमितता की जांच के आदेश दे दिए। न्यायालय ने बाकी के गांवों के किसानों को 64 प्रतिशत वृद्धि के साथ मुआवजा देने और विकसित जमीन देने के आदेश दिए हैं।

न्यायमूर्ति एस.यू. खान, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति वी.के.शुक्ल की विशेष पीठ ने इस मामले में अपना फैसला पिछले 30 सितम्बर को ही सुरक्षित कर लिया था। न्यायालय के फैसले की जानकारी देते हुए किसानों के वकील पंकज दुबे ने संवाददाताओं से कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा के 63 गांव के किसानों की 491 याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया है।

दुबे ने बताया कि न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा के दो गांवों- शाहबेरी, और देवला तथा नोएडा के असदुल्लापुर गांव में भूमि अधिग्रहण पूरी तरह रद्द कर दिया। इन गावों में अभी किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था। इन गावों के किसानों को कहा गया है कि वे प्राप्त हुए मुआवजे वापस कर दें। दुबे के मुताबिक न्यायालय ने दो गांवों के किसानों की याचिकाएं खारिज कर दी। बाकी सभी 58 गांवों के किसानों को अब तक प्राप्त मुआवजे से 64 फीसदी अधिक मुआवजा और 10 फीसदी विकसित जमीन देने के न्यायालय ने आदेश दिए हैं।

दुबे ने कहा कि अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह प्रमुख सचिव स्तर के किसी अधिकारी को नियुक्त कर ग्रेटर नोएडा और नोएडा में भूमि अधिग्रहण में हुई अनियिमतताओं की जांच कराएं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कारवाई करें। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की अनुमित के बगैर अब वहां पर कोई नया निर्माण नहीं होगा।

ज्ञात हो कि ग्रेटर नोएडा के 40 और नोएडा के 23 गांवों के किसानों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर कर राज्य सरकार के अधीन आने वाली नोएडा अथॉरिटी द्वारा किए गए लगभग 5,000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को चुनौती दी थी। किसानों का कहना है कि अथॉरिटी ने ‘अर्जेन्सी क्लॉज’ लगाकर उनकी जमीन औने-पौने भाव में ले ली थी और बाद में जमीन बिल्डरों को बेच दी गई।

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