रायपुर, 23 अप्रैल.  अगवा डीएम एलेक्स पॉल मेनन की लोकेशन के बारे में पुलिस को पता चल गया है।  मेनन को बस्तर जिले के जंगलों में करीब 300 नक्सलियों ने बंधक बनाकर रखा हुआ हैं।

डीएम की लोकेशन पता चलने के बाद सुरक्षाबालों ने बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान पर रोक लगा दी है। सरकार नक्सलियों से अभी मुठभेड़ नहीं करना चाहती। राज्य सरकार ने एलेक्स पॉल मेनन के रिहा होने तक नक्सल विरोधी अभियान पर रोक लगाने को कहा है। पुलिस का पूरा ध्यान मेनन को नक्सलियों के चंगुल से सुरक्षित और जल्द से जल्द रिहा कराने पर है।  नक्सलियों ने मेनन को रिहा करने के बदले ऑपरेशन ग्रीन हंट को बंद करने और आठ साथियों की रिहाई की मांग की है।

हरसंभव सहायता मुहैया कराएगा केंद्र

दूसरी तरफ केंद्र सरकार सुकमा जिले के डीएम एलेक्स पॉल मेनन के माओवादियों के हाथों अपहरण मामले में प्रदेश सरकार के साथ लगातार संपर्क में है। साथ ही केंद्र इस संकट से निपटने में राज्य सरकार को हरसंभव सहायता मुहैया कराएगा। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने बताया कि केंद्र इस मामले में राज्य सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। छत्तीसगढ़ सरकार को इस संकट से निपटने में जिस तरह की भी सहायता चाहिए होगी केंद्र उसे मुहैया कराएगा। सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से बातचीत करके उन्हें जरूरत पडऩे पर अतिरिक्त केंद्रीय बल मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। मेनन भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2006 बैच के अधिकारी हैं। उनका अपहरण वैसे समय में हुआ जब ओडिशा में बीजू जनता दल के विधायक झिना हिकाका को माओवादियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए राज्य सरकार और उग्रवादियों के बीच बातचीत अभी चल ही रही है।

सरकार झुकी, रोका नक्सल विरोधी अभियान

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सुकमा जिले के जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन के नक्सलियों की कैद से छूटने तक राज्य में नक्सल विरोधी अभियान पर रोक लगाने को कहा है। राज्य पुलिस मुख्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, पूरा ध्यान मेनन को नक्सलियों के चंगुल से सुरक्षित व जल्द से जल्द मुक्त कराने पर है। नक्सल विरोधी अभियान बाद में चलाया जा सकता है।

गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, राज्य सरकार नक्सलियों की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और राज्य के सभी राजनीतिक दलों को भरोसे में लेने के बाद ही लिया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नक्सलियों की मांग सामने आने के बाद डीएम की सुरक्षित रिहाई की उम्मीद बढ़ गई है। उनके अनुसार जिन नक्सलियों को छोडऩे की मांग की गई है, वे सभी छत्तीसगढ़ के हैं और उनमें कोई बड़ा नक्सली नेता नहीं है। केंद्र सरकार की चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि डीएम की सुरक्षा को देखते हुए अबूझमाड़ समेत राज्य से अन्य इलाकों में जारी नक्सल विरोधी आपरेशन रोक दिया गया है। अबतक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी आपरेशन के तहत राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवानों ने पिछले महीने ही अबूझमाड़ के जंगलों में कार्रवाई शुरू की थी। इन जंगलों में नक्सलियों का राज चलता था और पिछले तीन दशकों से कोई भी सरकारी कर्मचारी यहां घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। वैसे केंद्र में बैठे सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी की खराब सेहत उनकी जल्द रिहाई में मददगार साबित हो सकता है। उन्हें अस्थमा है और इसके लिए उनके पास केवल दो दिन की ही दवाई है। जाहिर है दवाई खत्म होने के बाद घने जंगल के बीच उनकी देखभाल करना नक्सलियों के लिए मुश्किल होगा।

बालाघाट जिले में हाई एलर्ट

नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में पुलिस ने दौरा करने वाले जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए हाई एलर्ट घोषित किया है. पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर ने बताया कि जन प्रतिनिधि एवं प्रशानिक अधिकारी पुलिस को सूचना दिये बिना प्रवास पर चले जाते हैं और पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधन नहीं होने के कारण नक्सली घात लगाकर घटना को अंजाम दे देते हैं.  बढ रही नक्सली घटनाओं के मद्देनजर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशानिक अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा बरतने एवं चौकन्ना रहने की सलाह दी गयी है. तीन विधान सभा क्षेत्र के विधायकों लांजी से रमेश भटेरे, परसवाडा से रामकिशोर कावडे तथा बैहर से भगत नेताम को विशेष रूप से क्षेत्र में प्रवास के दौरान पुलिस को पूरी जानकारी देने के लिये सचेत किया गया है.

अतुलकर ने कहा कि नक्सली अक्सर वी.आई.पी को निशाना बनाकर घटना को अंजाम देते हैं और ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को नजर अंदाज करना खतरनाक हो जाता है. उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है.

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