सेवानिवृत्त डीसी के खिलाफ सुनाया कोर्ट ने फैसला

सतना, 23 दिसम्बर, नव.सं. पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के महत्वपूर्ण मामले में अदालत ने निर्णय सुनाते हुये आरोपी सेवा निवृत्त सहायक आयुक्त वाणिज्यकर बी.एस. पंथी को चार सालकी कैद तथा चालीस लाख रुपये का जुर्माना अदा करने के आदेश दिए हैं.

विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के पीठासीन संजय शुक्ला ने आरोपी बी.एस. पंथी के विवाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा -13 (2) के तहत दोषी मानते हुये 4 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 40 लाख के अर्थदण्ड सेदण्डित किया है. अर्थदण्ड की अदायगी नहीं हो पाने कीस्थिति में 1 वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावासकी सजा सुनाई है. अभियोजन के अनुसार सतना के तत्कालीन सह वाणिज्यकर आयुक्त बी.एस. पंथी के चेक पीरियड 1 अगस्त 92 से 5 जून  02 तक निर्धारित अवधि में कुल आय 17 लाख 51 हजार 546  रुपये अर्जित किए जबकि इस अवधि में प्राप्त आय से 53 लाख 41 हजार 026 रुपये व्यय किये गए.   प्रकरण के विवेचना कर्ता आशुतोष पाण्डेय ने 35 लाख 89 हजार 480 रुपये की अनुपातहीन सम्पत्ति अर्जित की. प्रकरण की सुनवाई के दौरान आरोपी ने बचाव साहसी केतौर पर सम्पत्ति केलिए कई तरह के विवरण प्रस्तुत किए लेकिन उचित साक्ष्य न होने के कारण न्यायालय ने उन्हें स्वीकार नहीं किया.

प्रकरण में अभियोजन की ओर से दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कुल 43 साक्षीगण के कथन कराए गए. इसीप्रकार बचाव दल की ओर से भी दस्तावेजी साक्ष्य का सहारा लेते हुये आरोपी सहित  कुल 4 साक्षीगण केकथन कराए गए. न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों को आधार बनाते हुये  आरोपी लोक सेवक को पद के दुरुपयोग कादोषी माना. न्यायालय ने स्वीकार किया कि आय के समस्त ज्ञात स्रोतों से हुई आय 12 लाख 77 हजार 107 रुपये आंकी गई है. जबकि इसी अवधि उनका व्यय 47 लाख 16 हजार 032 रुपये आंका गया. इस प्रकार आरोपी की आय तथा उनके द्वारा किए गए व्यय में 34 लाख 38 हजार 925 रुपये का अन्तर पाया गया है जो लगभग 269 प्रतिशत अधिक है. प्रकरण में शासन की ओरसे अपर लोक अभियोजक रमेश मिश्रा तथा आरोपी की ओर से प्रकाश चन्द्र निगम ने पैरवी की.

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