•  चार माह पहले किया था उत्तर-पुस्तिका मूल्यांकन कार्य

शाजापुर 13 अक्टुबर. कुछ माह पूर्व संपन्न हुई बोर्ड परीक्षा में जिला मुख्यालय सहित अन्य क्षेत्रों के छात्रों ने भी परचम लहराया था. जिसके लिए शिक्षा विभाग ने अपनी पीठ थपथपाई थी. लेकिन विभाग उन्हें भूल गया जिन्होंने विभाग को अपनी पीठ थपथपाने का मौका मुहैया कराया था. आज चार माह बीत जाने के बाद भी विभाग ने इन शिक्षकों की सुध नहीं ली है और उत्तर-पुस्तिका मूल्यांकन कार्य में लगे करीब 400 शिक्षकों के दिन पारीश्रमिक भुगतान के इंतजार में कट रहे हैं.

  •  विभाग ने खिचें अपने हाथ

शिक्षा को उच्च स्तर पर पहुंचाने के लिए विभाग कई कवायदें करता है, जिसमें इन शिक्षकों को ही झोंका जाता है, लेकिन जब इन शिक्षकों के हक की बात आती है तो विभाग अपने हाथ खिंच लेता है. विगत अप्रैल माह में विभाग द्वारा बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य कराया गया था. इसके बाद परिणाम भी घोषित हो गए और आज तक मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों के पारीश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है. जिन्हे कहा गया था कि कक्षा 10वी के लिए इन्हें 9 और कक्षा 12वी की प्रत्येक कॉपी के लिए 10 रूपए का भुगतान किया जाएगा.

  •  कब आएंगे ऊपर से आदेश

विभाग द्वारा दिए गए आदेश का पालन तो शिक्षकों ने बखूबी किया, लेकिन इनका हक अदा करना तो दूर विभाग इनके बारे में सोच भी नहीं रहा है. इस संबंध में वरिष्ठों का कहना है कि अभी रि-टोटलिंग होगा उसके बाद जब ऊपर से आदेश आएंगे तभी इनके पारीश्रमिक का भुगतान किया जाएगा. जबकि इन दिनों त्यौहारों का मौसम चल रहा है जब हर किसी को लक्ष्मी दर्शन की लालसा होती है. जब विभाग ऐसे समय में इनके अधिकार सुरक्षित नहीं रख पा रहा है तो फिर आगे इनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है.  उत्तर-पुस्तिका मूल्यांकन के पारीश्रमिक का भुगतान केवल जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में कहीं भी नहीं हुआ है. शिक्षकों के पारीश्रमिक की राशि सीधे उनके खाते में ही डाली जाएगी. अक्टूबर-नवंबर तक ही इस कार्य की राशि का भुगतान संबंधित शिक्षकों को किया जाता है. (पी.के. मंडलोई, प्राचार्य उत्कृष्ट विद्यालय शाजापुर)

  • छठे वेतनमान के लिए तरसते विश्वविद्यालयीन पेंशनर

उज्जैन. एक ओर म.प्र. शासन वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ ही पेंशनरों को भी विभिन्न सुविधाएं देने की बात जोरशोर से करता है लेकिन दूसरी ओर इसका ध्यान विश्वविद्यालयीन पेंशनरों की समस्या की ओर नहीं है. परिणामस्वरूप ये पेंशनर्स परेशान होकर मंत्री से लेकर अधिकारी से मिलने के लिए भोपाल के चक्कर लगाते हैं. उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालयीन पेंशनरों को अभी तक छठा वेतनमान लागू नहीं हो सका है.
इसे प्रदेश के विश्वविद्यालयीन पेंशनरों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उनकी सुनवाई न तो मुख्यमंत्री ही कर रहे हैं और न ही अधिकारी ही समस्या को दूर करने के लिए आगे आ रहे हैं. प्रदेश के अन्य सभी विभागों के पेंशनरों को कर्मचारियों के साथ ही छठे वेतनमान लागू हो गया है और इसके अनुसार ही पेंशन प्राप्त हो रही है परंतु विश्वविद्यालय के पेंशनरों को इसका लाभ आज तक नहीं मिल सका है. हालांकि पेंशनरों के संगठन ने कई बार मुख्यमंत्री को इस संबंध में अवगत कराया लेकिन परिणाम अनुकूल नहीं मिला. फलस्वरूप आज भी संगठन के पदाधिकारियों द्वारा इस मामले में पत्र व्यवहार जारी है. यह तो बात हुई छठे वेतनमान की लेकिन इन पेंशनरों को समय पर पेंशन भी नसीब नहीं होती है. हालांकि पिछले 2-3 माह से व्यवस्था सुधारने का प्रयास जरूर हुआ है बावजूद इसके पेंशन देरी से ही संबंधित बैंक खातों में डल रही है. इसके कारण पेंशनरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है. इधर पेंशनर संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि पेंशनरों के साथ शासन सौतेला व्यवहार कर रहा है. जब अन्य विभागों के पेंशनरों को समस्त लाभ दिया जा चुका है तो फिर विश्वविद्यालय के पेंशर इन लाभों से महफूज क्यों?

पेंशनरों ने अपनी समस्या के संबंध में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से मिलने के लिए पिछले कई माह से समय मांग रखा है परंतु अभी तक समय ही नहीं दिया. इतना ही नहीं जितने चिट्ठियां छठे वेतनमान को लागू करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री मुख्यालय भेजी गई उसका भी माकूल जवाब आज तक प्राप्त नहीं हो सका. अधिकांश पेंशनर केवल अपनी पेंशन पर ही परिवार का पालन-पोषण करते हैं और जब समय पर पेंशन नहीं आती है तो फिर इनकी आर्थिक स्थिति और विकट हो जाती है

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