aviation1नई दिल्ली,  हवाई यात्रियों की संख्या पांच साल में चार गुणा बढ़ाकर 30 करोड़ करने के लक्ष्य के साथ छोटे शहरों के लिए हवाई यात्रा का खर्च कम करने तथा देश के विमानन उद्योग को 2022 तक दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुँचाने के उद्देश्य से सरकार ने आज नयी राष्ट्रीय विमानन नीति को मंजूरी दे दी.

नयी नीति में अंतरराष्ट्रीय रूटों पर उड़ान शुरू करने के लिए घरेलू एयरलाइनों के लिए पांच साल की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है. यहाँ हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने बताया कि राष्ट्रीय विमानन नीति 2016 को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है. इसे जून-सितंबर की चालू तिमाही में लागू कर दिया जायेगा. उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया.

राजू ने कहा कि वर्तमान में घरेलू रूटों पर महज आठ करोड़ यात्री सालाना यात्रा करते हैं. पांच साल में इनकी संख्या बढ़ाकर 30 करने के उद्देश्य से नयी नीति के तहत टीयर-2 और टीयर-3 के अविकसित और कम यातायात वाले हवाई अड्डों को क्षेत्रीय हवाई अड्डों की सूची में शामिल कर एक घंटे तक की उड़ान के लिए सभी करों और शुल्कों समेत अधिकतम किराया 2500 रुपये होगा. मेट्रो शहरों के विकसित हवाई अड्डों से क्षेत्रीय हवाई अड्डों या क्षेत्रीय हवाई अड्डों से मेट्रो शहरों के हवाई अड्डों की उड़ानों पर भी यह नियम लागू होगा.

सरकार ने इस योजना के तहत तीन साल में 50 नये हवाई अड्डे विकसित करने का लक्ष्य रखा है. वर्तमान में 70 ऐसे हवाई अड्डे हैं, जहाँ से नियमित हवाई सेवा उपलब्ध हैं. योजना का लक्ष्य देश के मध्यम वर्ग को रेल की जगह हवाई यात्रा के लिए प्रोत्साहित करना है. इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में सरकार ने इस नीति का प्रारूप जारी किया था, जिस पर आम लोगों से राय माँगी गई थी.

मंत्री ने बताया कि नयी नीति का उद्देश्य हवाई यात्रा को मध्यम वर्ग की जेब के दायरे में लाना तथा क्षेत्रीय विकास में संतुलन के साथ पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है. साथ ही देश में कारोबार आसान बनाना भी इसका एक लक्ष्य होगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति में क्षेत्रीय संपर्क, कार्गो, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (एमआरओ) तथा कौशल विकास पर फोकस है.

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