1swachhataभोपाल ,1 जून,नभासं. प्रदेश में स्वच्छ भारत की परिकल्पना को साकार करने में समुदाय के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी. जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिये बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के साथ-साथ स्वच्छता और शिक्षा दोनों के लिए प्रयास किए जाएंगे.

प्रदेश में 24 फीसदी ग्रामीण आबादी ही शौचालय का उपयोग कर रही है. इसी तरह शहरी क्षेत्र में भी 22 फीसदी लोग शौचालय का उपयोग नहीं करते हैं, जबकि बांग्लादेश जैसे छोटे देश की स्थिति यहां से बेहतर है. गौरतलब है प्रदेश को वर्ष 2018 तक खुले में शौच की बुराई से मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

किन्नरों का भी उपयोग
इधर,सरकार ने शौचालय निर्माण के लिए जागरूकता लाने के लिए किन्नरों का भी उपयोग करने का निश्चय किया है. उधर,सभी गाँव पूरी तरह साफ-सुथरे हो इसीलिये पंच परमेश्वर योजना में सीमेंट-कांक्रीट की पक्की सड़कें और नालियाँ बनाई जा रही है.

बीकानेर और नादिया से प्रेरणा
प्रदेश में ग्रामीण अंचलों में शौचालय निर्माण के लिये समुदाय को प्रेरित करने की रणनीति बनाने के लिए बीकानेर और नादिया के माडल पर चर्चा चल रही है.पिछले दिनों इस पर प्रजेंटेशन भी दिया गया था.

बीकानेर देश का चौथा सबसे बड़ा जिला है और अब वहां 80 फीसदी ग्रामीण आबादी शौचालय सुविधा का उपयोग कर रही है. उधर,पश्चिम बंगाल के नादिया जिले को पूरी तरह से खुले में शौच की बुराई से मुक्त करने और शत-प्रतिशत आबादी के लिये शौचालयों की व्यवस्था की गई है.

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