काले धन पर अगला प्रहार, ज्यादा पारदर्शिता लाने की कवायद

नयी दिल्ली,

मोदी सरकार में काले धन पर लगातार वार किया जा रहा है, ऐसे में आनेवाले वक्त में काले धन के कारोबारियों के लिए कोई जगह सुरक्षित नहीं रहनेवाली है.

शेयर बाजार भी अब सरकार की निगाह में आ चुका है क्योंकि यह काला धन छिपाने की एक सुविधाजनक जगह बन गया है. पिछली साल से सरकार रत्न और आभूषणों के खुदरा कारोबार में भी ज्यादा पारदर्शिता लाने की कवायद कर रही है. अब सरकार जेम्स ऐंड जूलरी सेक्टर पर कड़ी नजर रखने के लिए नए नियम तैयार कर रही है.

खुदरा आभूषण दुकानदारों को 6 लाख रुपये से ज्यादा की खरीद की जानकारी फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट को देनी होगी. रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि प्रस्ताव पर काम हो रहा है. नए नियम ऐशो-आराम के अन्य सामान बेचनेवाले दुकानदारों पर भी लागू होंगे.

पिछले साल अक्टूबर महीने में सरकार ने अपने अगस्त के आदेश को वापस लेते हुए रत्न-आभूषणों के कारोबारियों को पीएमएलए से मुक्त कर दिया. तब राजस्व सचिव हंसमुख अधिया ने कहा था कि सरकार काले धन पर रोक लगाने के लिहाज से सोने या बहुमूल्य पत्थरों की खरीद के लिए नकद रकम देने की सीमा तय करेगी.

उन्होंने कहा था, इस मामले में उठाए गए उचित मुद्दों पर बातचीत करके और सभी पक्षों से सलाह लेकर अलग से एक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.

अगस्त 2017 में सरकार ने जेम्स ऐंड जूलरी डीलरों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) के अधीन ला दिया. इसके तहत 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के टर्नओवर वाले जूलरों को रिपोर्टिंग एंटिटीज में तब्दील कर दिया गया.

इस आदेश से नकारात्मकता का माहौल पैदा हो गया था क्योंकि रिपोर्टिंग की रकम की सीमा नहीं तय की गई थी. ऐसे में जूलर्स 50,000 रुपये से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्शन की जानकारी सरकार को देने लगे. इसका असर त्योहारी मौसम में जूलरी की खरीद पर पड़ा और लोग आभूषण खरीदने से बचने लगे.

तीन साल बाद गैरजरूरी हो जाएंगे बैंक: अमिताभ कांत

तीन साल बाद लोगों को वित्तीय काम के लिए बैंक में जाने की जरूरत ही नहीं होगी और इनका अस्तित्व भी नहीं होगा. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने गुरुवार को यह बात कही.

कांत ने कहा कि भौतिक रूप से बैंक और उनकी शाखाओं में जाना अगले तीन साल में अप्रासंगिक हो जाएगा क्योंकि डेटा विश्लेषण से वित्तीय समावेशन को और गति मिलेगी.

कांत ने कहा कि बैंकों की शाखाओं में जाना खत्म हो जाएगा. इसका कारण बड़े पैमाने पर डेटा का उपयोग तथा डेटा विश्लेषण है. यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांत ने कहा कि उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र देश है, जहां एक अरब से अधिक लोगों को आधार कार्ड (बायोमेट्रिक) जारी किए गए हैं. अगले तीन साल में भारत में एक अरब से अधिक स्मार्टफोन होंगे.

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