भारत में राष्टï्रीय स्तर पर गणतंत्र दिवस समारोहों का प्रारंभ इसकी पूर्व संध्या पर राष्टï्रपति का राष्टï्र के नाम संबोधन व राज्यों में राज्यपालों के संबोधन से प्रारंभ होता है. इस बार राष्टï्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के राष्टï्रीय संबोधन में हाल ही में हुए पठानकोट एयरफोर्स बेस पर आतंकी हमले का प्रभाव रहा और राष्टï्र का दृढ़ निश्चय भी व्यक्त किया गया. श्री मुखर्जी ने पाकिस्तान को इंगित करते हुए कहा कि गोलियों की बौछार के बीच शांति चर्चा नहीं हो सकती. जटिल मुद्दे और समस्याएं शांतिपूर्ण वार्ता कर ही सुलझाए जा सकते है. बिना किसी सिद्धांत की लड़ाई एक कैंसर है जिसे काट कर फेंकना होगा. आतंक का ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ वर्गीकरण नहीं होता.

वह पूरी तौर पर बदनुमा है. वे राष्टï्रों की मान्य सीमाओं का उल्लंघन करते है जिससे हम सभी अराजकता के युग में जा रहे है. राष्टï्रपति के भाषण से यह स्पष्टï संकेत मिलता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की और उसके बाद प्रस्तावित प्रधानमंत्री श्री मोदी की पाकिस्तान यात्रा और आगे की वार्ता अब उसी वातावरण पर निर्भर करेगी कि पठानकोट पर हुए आतंकी हमले के संदर्भ में पाकिस्तान क्या कार्यवाही करता है. उसने मुंबई में होटल ताज, ओबेराय ट्रीरेन्ट व शिवाजी रेल टर्मिनल पर हुए आतंकी हमलों पर अभी तक कारगार कुछ भी नहीं किया है. बिना कुछ स्पष्टï बताये सिर्फ गोलमोल यही कह पा रहा कि भारत के द्वारा दिये गये सबूत काफी नहीं है. असद मसूद तब से आज तक वहां गिरफ्तार नहीं किया गया है. अभी यह खबर आयी थी कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है- जो सही नहीं निकली.

इस गणतंत्र दिवस पर फ्रान्स के राष्टï्रपति फ्रान्कोइज औलांद गणतंत्र परेड में प्रमुख अतिथि थे और पहली बार परेड में किसी विदेशी सैन्य टुकड़ी के रूप में फ्रांस के एक फौजी दस्ते ने भी सलामी परेड में सलामी दी थी. श्री ओलांद ने भी उनकी भारत यात्रा के दौरान यह कहा कि पठानकोट हमले पर पाकिस्तान को यह दिखाना होगा कि उसनेे इस मामले में क्या कार्यवाही की. भारत की यह मांग उचित है. भारत की तरह फ्रान्स भी हाल के दिनों में उसके देश में एक साप्ताहिक अखबार के दफ्तर व राजधानी पेरिस में आतंकी हमले झेल चुका है. इस मामले में भारत व फ्रान्स की भावनाएं व संवेदनाएं एक-सी हैं.

भारत के गणतंत्र दिवस में एक विशेषता यह भी चली आ रही है कि वह सैन्य शक्ति के साथ-साथ आर्थिक शक्ति का भी बराबरी से प्रदर्शन करता है. सैनिक दस्तों की सलामी परेड के बाद विभिन्न क्षेत्रों व राज्यों में हो रही प्रगति का प्रदर्शन झांकियों के द्वारा कराया जाता है. गणतंत्र दिवस की परेड में विकास झांकियों से भारत सैन्य शक्ति के साथ आर्थिक प्रगति का भी आभास हो जाता है. संसार में अब यह मान्य सिद्धान्त व स्थिति है कि कभी सैन्य शक्ति प्रमुख हुआ करती थी, लेकिन सैन्य शक्ति का आधार किसी देश की आर्थिक शक्ति ही होती है. अब विश्व में सैन्य शक्ति से कहीं ज्यादा आर्थिक शक्ति का प्रदर्शन प्रभावी बन गया है.

इस समय विश्व में आतंक के कारण विकास सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है. राष्टï्रों का जो धन और आर्थिक सार्मथ्य विकास में लगना चाहिए, उससे कहीं ज्यादा धन राज्यों की आतंक की सुरक्षा व्यवस्था और आतंक के विरुद्ध सेना व पुलिस की तादाद व व्यवस्था पर खर्च हो रहा है. अब इस्लामी स्टेट के नाम पर मध्य एशिया के अरब राष्टï्रों में युद्ध की स्थिति बन गयी है. एक प्रभावित देश सीरिया की पूरी आबादी भागकर शरणार्थी के रूप में यूरोप के सभी देशों में शरण के नाम पर जा पहुंची है और उन देशों का आर्थिक बोझ बढ़ गया है.

गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 17 और रिजर्व बटालियनें बनाने का निर्णय लिया है जिन्हें काश्मीर में तैनात किया जायेगा. भारत में हाल ही के दिनों में कई ऐसे लोगों को पकड़ लिया गया है जिनका इस्लामी स्टेट से संबंध है. इसमें से एक रिजवान नाम का आतंकी इस्लामी स्टेट के प्रमुख अल बगदादी से सीधे संपर्क में है. उत्तराखंड के रुडकी में 4 आतंकी पकड़़े जाने से यह उजागर हो गया है कि भारत में एक अल्पसंख्यक समुदाय में इस्लामी स्टेट के आतंकी आ चुके हैं. इस गणतंत्र दिवस के आसपास लंबी चौड़ी गिरफ्तारियों से यह बता दिया गया है कि भारत अपने जनतंत्र-गणतंत्र की रक्षा व सुरक्षा में चाकचौबंद है.

पाकिस्तान को भारत ने और दूसरे राष्टï्रों के राष्टï्राध्यक्षों व प्रधानमंत्रियों ने भी आगाह कर दिया है कि पाकिस्तान आतंकियों का अड्डïा (हेवन) बना हुआ है और उसे इन्हें नष्टï करना ही पड़ेगा. अब सभी मुस्लिम राष्टï्र भी इस्लामी स्टेट, अलकायदा, जमाते संगठन से त्रस्त हो गये हैं और अब उनके सामने आतंकी संगठनों से राष्टï्रों के विघटन का संकट खड़ा
हुआ है.

गणतंत्र के पूर्व दिवस पर मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीटी बजाकर इंदौर को राज्य का पहला और देश का दूसरा खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित किया है और घोषणा की है कि ”इंदौर मॉडलÓÓ से मध्यप्रदेश को देश का पहला खुले में शौच से मुक्त राज्य बनाया जायेगा. इसके लिये जरूरी है कि जब तक टायलेट में जाना लोगों की आदत न बन जाए तब तक सख्ती से मानीटरिंग चलती ही रहे अन्यथा मॉडल ही बिगड़ जायेगा.

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