बैतूल,  आजादी के सात दशक पूरे होने को है लेकिन आज भी आदिवासी अंचल के आधा सैकड़ा गांव नारकीय जीवन जीने विवश है। सांझ ढलते ही गांव अंधेरे में गुम हो जाते है।

इन गांवों के बांशिदे आज भी विकास को तरस रहे है और अभावों में जी रहे है, मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। जिले के सात आदिवासी विकासखंडों के 44 गांवों की बात करें तो इन विकासखंडों के 44 गांवों विद्युत वितरण कंपनी के अविद्युतीकरण क्षेत्र में दर्ज है।

इन गांवों में बिजली पहुंचाने कंपनी के कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे है। इन गांवों में चुनावों के दौरान जनप्रतिनिधि पहुंचते है आश्वासन देते है लेकिन हर बार ग्रामीणों को अंधेरा ही नसीब होता है। चुनाव जीतने के बाद यहां का रुख तक नहीं करते। वहीं प्रशासन भी इन गांवों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में बौना साबित हो रहा है।

मप्र विद्युत वितरण कंपनी से प्राप्त सुचि के अनुसार बैतूल जिले के भीमपुर, चिचोली,शाहपुर, आमला, भैंसदेही, आठनेर एवं घोड़ाडोंगरी के 7 विकासखंडों के 44 ग्राम आज भी अंधेरे में जीवन यापन कर रहे है।

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