नई दिल्ली, 17 अप्रैल. देश और सूबे की आंतरिक सुरक्षा के मसले को लेकर टकराव की राह से हटकर मुख्यमंत्री अखिलेश ने माना है कि सुरक्षा और विकास से जुड़े हर काम में केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच आपसी सहयोग बेहद जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने यूपी को पुलिस आधुनिकीकरण के लिए जारी 100 करोड़ रुपये की रकम पर खुलकर ऐतराज भी जताया है.

केंद्र सरकार से उन्होंने दोटूक कहा कि आठ हजार करोड़ के बजट वाली यूपी पुलिस के लिए कम से कम 800 करोड़ रुपये तो बनते ही हैं. सूबे में कानून व्यवस्था सुधारने की बड़ी चुनौती से जूझ रही यूपी की नई सरकार ने मुख्यमंत्रियों की बैठक में एक सकारात्मक सोच का परिचय दिया. आगामी महाकुंभ में सुरक्षा और बेहतर कानून व्यवस्था बनाने का मसला हो या फिर पुलिस सुधार प्रक्रिया को गति देने की बात, आंतरिक सुरक्षा को लेकर नई सरकार ने एक समग्र सोच पेश की है. मुख्यमंत्री ने माना कि प्रदेश में आबादी के हिसाब से पुलिस बल की संख्या नाकाफी है. इसलिए भविष्य में पुलिस बल में और वृद्घि होगी. पुलिस आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए 100 करोड़ की केंद्रीय राशि पर अखिलेश ने असंतोष जताया. उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस के आठ हजार करोड़ के बजट की तुलना में यह रकम बहुत कम है. पुलिस बजट की कम से कम दस फीसदी रकम या 800 करोड़ रुपये मिलने चाहिए. अल्पसंख्यकों के हितों के सरंक्षण को मुख्यमंत्री ने अपने एजेंडे में प्रमुखता से रखा है.

पुलिस बल की आवासीय व्यवस्था के लिए पांच सालों में 5,000 करोड़ रुपये की मदद की मांग की गई है. पुलिस बल को सूचना तकनीक, वैज्ञानिक और आधुनिक दृष्टि से मजबूत बनाने की ओर कई अहम मसलों पर मदद मांगी गई है. फोरेंसिक साइंस लैब की जरूरत पर जोर देते हुए 750 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. वहीं साइबर क्राइम पर लगाम लगाने की पहली बार पहल करते हुए प्रदेश में ‘स्टेट ऑफ द आर्टÓ नाम की साइबर अपराध यूनिट लगाने का ऐलान किया है. इसके लिए केंद्र से सहयोग की अपील की गई है. बड़े शहरों में बेहतर पुलिस व्यवस्था कायम रखने की प्रणाली मेगासिटी पुलिसिंग को गौतमबुद्घ नगर और गाजियाबाद में शुरू करने लिए केंद्र से आधुनिक उपकरण और संसाधन मुहैया कराने के लिए कहा है. जाली भारतीय मुद्रा की जांच के लिए लखनऊ या कानपुर में एक लैबोरेटरी खोलने की अपील की गई है.

वहीं पुलिस कार्यालयों को आपस में कंप्यूटर नेटवर्क पर जोडऩे की प्रणाली क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम के क्रियान्वयन के मसले पर भी अखिलेश ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि बार-बार प्रणालियां बदलने के कारण कोई भी सिस्टम अब तक लागू नहीं किया जा सका है. वामपंथ उग्रवाद से निपटने के लिए अधिक धन की मांग के साथ ही दोषी व्यक्तियों को दंडित किए जाने में हो रही देर के लिए जिम्मेदार व्यवस्था को बदलने की मांग की गई है. इसके लिए त्वरित अदालतें गठित करने पर जोर दिया गया है.

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