वाराणसी, 14 अक्टूबर .सुशासन और स्वच्छ राजनीति के लिए देश भर में अलख जगाने निकले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की जनचेतना यात्रा को सफल बनाने के लिए परदे के पीछे कम से कम 80 लोगों की टीम काम कर रही है।

इनमें 20 लोगों की एक कोर टीम है, जिसकी अगुवाई पार्टी महासचिव अनंत कुमार के नेतृत्व में बनी चार नेताओं की टीम कर रही है। आडवाणी की यात्रा चूंकि 34 दिनों तक चलेगी और वह प्रत्येक दिन लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करने के साथ ही प्रतिदिन चार सभाओं को संबोधित कर रहे है। उनके साथ दो दर्जन से अधिक गाडिय़ों का काफिला चल रहा है। ऐसे में आडवाणी के कार्यक्रम के साथ अन्य व्यवस्थाओं और प्रबंधन की जिम्मेदारी काफी अहम हो जाती है। अनंत कुमार यूं तो पूरे कार्यकम का संचालन कर रहे है लेकिन वे अधिकांश समय आडवाणी के साथ रहते है। ऐसे में उनकी टीम के प्रमुख सदस्य व सहायकों रविशंकर प्रसाद, मुरलीधर राव और श्याम जाजू की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। प्रबंधन और व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद अनंत कुमार देख रहे है तो कार्यक्रमों के समन्वय की जिम्मेदारी मुरलीधर राव और श्याम जाजू पर है जबकि मीडिया प्रबंधन का जिम्मा रविशंकर प्रसाद खुद सम्भाल रहे है। यहां तक कि आडवाणी कहां क्या बोलेंगे और कौन सा मुद्दा उठाएंगे, ये भी बैठकों में तय होता है। यात्रा के सह संयोजक बनाए गए श्याम जाजू ने कहा कि हम 20 लोगों की कोर टीम प्रतिदिन सुबह एक बैठक करती है।

इसके बाद मुरलीधर राव या मेरे नेतृत्व में एक टीम प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों की समीक्षा करने पहुंचती है। समीक्षा करने के बाद व्यवस्था की जानकरी अनंत और रविशंकर को दी जाती है। उन्होंने बताया कि काफिले के साथ चल रहे पत्रकारों को इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एक आईटी टीम पर है जो अपने इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है। इसके लिए यात्रा के साथ चल रहे लोगों का यदि स्वास्थ्य बिगड़ता है तो उन्हे तुरंत इलाज मुहैया कराने के लिए भी अच्छी व्यवस्था है। वाहनों के काफिले के साथ दो एम्बुलेंस भी चल रही है जिनमें स्वास्थ्य की अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद है।  भाजपा का चिकित्सा प्रकोष्ठ इसकी देखरेख कर रहा है। इसके अलावा वाहनों के प्रबंधन, रखरखाव के लिए भी एक अलग टीम है जबकि जनचेतना यात्रा में शामिल लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था एक दूसरी टीम करती है। आडवाणी के लिए एक अलग वाहन है जो उनकी मांग पर चाय अथवा काफी की व्यवस्था करता है। पूरी यात्रा के दौरान आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी और उनके निजी सचिव दीपक चोपड़ा साये की तरह उनके साथ रहते है।  प्रतिभा अपने पिता की सेहत का पूरा ध्यान रख रही है। कब खाना है और क्या खाना है। कब दवाई लेनी है यह सब जिम्मेदारी प्रतिभा संभाल रही हैं। चोपड़ा अन्य कामों में आडवाणी की मदद करते है।

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