नहीं मान रही हैं ममता, अंक गणित में जुटी सरकार

नई दिल्ली, 19 सितंबर. कांग्रेस शासित राज्यों में अब 6 रियायती रसोई गैस सिलेंडरों की जगह आम उपभोक्ताओं को 9 सिलेंडर दिए जाएंगे। यह फैसला कर कांग्रेस ने एक बड़ा दांव चला है। कांग्रेस महासचिव एवं प्रवक्ता जर्नादन द्विवेदी ने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों में अब 9 सिलेंडर दिए जाएंगे।

कांग्रेस ने अपनी पार्टी की सरकार वाले 11 राज्यों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने आज फैसला किया कि उसके शासन वाले राज्यों में रियायती दाम के रसोई गैस सिलेंडर एक साल में छह की बजाए नौ दिए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी से बात करने की इच्छा जताई है। मुकुल रॉय के जरिये संदेश भिजवाया गया है। दिल्ली सरकार पहले ही बीपीएल परिवारों को 9 एलपीजी सिलेंडर देने की घोषणा कर चुकी है। रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या सीमित करने को लेकर सरकार में बीते दिनों दो सुर नजर आने लगे थे। केंद्रीय खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा सस्ते रसोई गैस सिलेंडर की संख्या तय का फैसला मध्यमवर्ग को रास नहीं आएगा।

थामस ने ऐसे परिवारों को थोड़ी बहुत अतिरिक्त राशि के साथ सिलेंडर देने की स्लैब प्रणाली का सुझाव दिया है। सरकार ने सस्ते (सब्सिडीशुदा) सिलेंडर की संख्या हर परिवार के लिए सालाना छह तय की है। थॉमस के पास उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का भी जिम्मा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में सलाह दी है कि कोई परिहार यदि साल में सात से 12 एलपीजी सिलेंडर चाहता है तो उस पर 50 रुपये प्रति सिलेंडर के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान लिया जाए। इसी तरह यह संख्या 13 से 24 होती है जो उसके लिए प्रति सिलेंडर 150 रुपये की अतिरिक्त राशि ली जाए।

उन्होंने सिफारिश की कि प्रति वर्ष 24 से अधिक सिलेंडर की जरुरत होने पर सरकार को कोई सब्सिडी नहीं देनी चाहिए और बाजार कीमत वसूल करनी चाहिए। थामस ने कहा कि सरकार का मौजूदा कदम मध्य वर्ग को नहीं भायेगा और उन्होंने इस संदर्भ में कोई स्लैब प्रणाली के बारे में सोचे जाने की सलाह दी है। गौर हो कि यूपीए सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के दृष्टि से एक साहसिक निर्णय करते हुए सरकार ने आज डीजल के दामों में 5 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि की और रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी को प्रति परिवार प्रति वर्ष छह सिलेंडर तक सीमित कर दिया था।

केंद्र से समझौता नहीं : ममता

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की ओर से गलतबयानी की गई है। समर्थन वापसी के मसले के बाद तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया।

मैंने यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी को डीजल कीमतों में वृद्धि और एफडीआई पर फैसले के विरोध में 14 सितंबर को ही बता दिया था। उनकी पार्टी सरकार के फैसले के साथ कोई समझौता नहीं करेंगी। ममता ने यह भी कहा कि सरकार ने फैसले से पहले क्यों नहीं बात की। अब सरकार और कांग्रेस दोनों गलतबयानी कर रहे हैं। केंद्र सरकार नाटक कर रही है। उन्होंने कहा कि मैं बंद की राजनीति में विश्वास नहीं करती हूं। उन्होंने आक्रामक रवैया अख्तियार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार झूठ बोल रही है। तृणमूल अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को लोगों को साल में 24 सिलेंडर देना चाहिए। इससे कम मंजूर नहीं है। सुधार सबके लिए हों, सिर्फ एक तबके के लिए नहीं। रिटेल में एफडीआई का फैसला तुरंत वापस होना चाहिए। इस संबंध में तृणमूल कोई समझौता नहीं करेगी। इससे पहले, कांग्रेस ने कहा था कि पीएम ने ममता से संपर्क करने की दो बार कोशिश की। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेसी नेताओं से अनुरोध करती हूं कि तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं करें।

उन्हें सच्चाई बतानी चाहिए। वहीं, केंद्रीय मंत्री मुकुल राय ने कहा कि मुझसे पीएमओ की तरफ से कोई बात नहीं हुई है। न ही पीएमओ की तरफ से कोई संदेश आया। इससे पहले, रेल मंत्री मुकुल रॉय ने बुधवार को कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) गठबंधन को बचाने के लिए गेंद अब कांग्रेस के पाले में है। रॉय ने इन दावों को खारिज किया कि मंगलवार को उनकी पार्टी द्वारा समर्थन वापसी की घोषणा किए जाने से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने तृणमूल से सम्पर्क का प्रयास किया था। रॉय ने कहा कि मैं नहीं जानता कि वे क्या कह रहे हैं, लेकिन तथ्य यह है कि मुझे कांग्रेस नेतृत्व से कोई संदेश नहीं मिला। यह पूछे जाने पर कि क्या गतिरोध दूर करने का कोई रास्ता बचा है, रॉय ने कहा कि हमने अपने निर्णय की घोषणा कर दी है। हम जनविरोधी नीतियों का समर्थन नहीं कर सकते। अब गेंद कांग्रेस के पाले में है। संप्रग के भाग्य का फैसला उन्हें करना है। गौर हो कि तृणमूल कांग्रेस की समर्थन वापसी के बाद यूपीए सरकार मुश्किल में घिर गई है। बुधवार सुबह प्रधानमंत्री आवास पर हुई कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक के बाद सरकार ने अपने फैसले पर कायम रहते हुए रोलबैक नहीं करने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा

दूसरी तरफ यूपीए सरकार से बाहर होने का ऐलान करने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अपना रुख और कड़ा कर दिया। पार्टी ने अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग रख दी है। पार्टी के सांसद कुणाल घोष ने कहा कि मंत्रियों से पहले प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने मंगलवार को करीब सवा तीन घंटे की बैठक के बाद कहा था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल उनके सभी छह मंत्री शुक्रवार को तीन बजे प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंप देंगे। तृणमूल के सांसद कुणाल घोष ने ट्विटर पर लिखा, तृणमूल के मंत्री शुक्रवार को इस्तीफा देंगे। उनका इस्तीफा स्वीकार करने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को स्वयं इस्तीफा देकर नए सिरे जनाधार प्राप्त करना चाहिए कि जनता उनकी नीतियों को समर्थन देती है या नहीं।

सरकार पर फिलहाल संकट नहीं

ममता के यूपीए सरकार से नाता तोडऩे के ऐलान से केंद्र सरकार पर तात्कालिक संकट तो नहीं, लेकिन दबाव बेहद बढ़ गया है। डीएमके का भारत बंद का समर्थन करना भी कांग्रेस समस्या के रूप में देख रही है। इसके अलावा एसपी और बीएसपी पर कांग्रेस की निर्भरता बढ़ेगी। पार्टी को लगता है कि संकट में सरकार को घिरा देखकर मायावती और मुलायम सिंह परेशानियां बढ़ाने से बाज नहीं आएंगे। ऐसे में संकेत हैं कि सबसे बड़े सहयोगी तृणमूल को यूपीए में कायम रखने के लिए सरकार कुछ कदम वापस खींच सकती है और बंगाल को भी आर्थिक सौगात दी जा सकती है। कांग्रेस मान रही है कि शुक्रवार तक इस्तीफे का समय देकर ममता ने सरकार के सामने विकल्प छोड़े हैं और वह बीच का रास्ता निकालने को मध्यस्थों के जरिये संपर्क में भी है। कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के चेयरमैन जनार्दन द्विवेदी ने इसके संकेत देते हुए कहा, लोकतंत्र में यही खूबी है कि सभी को हर मुद्दे पर राय रखने का हक है। इसी राय की वजह से यूपीए बना था और तृणमूल शुरू से हमारी बहुमूल्य सहयोगी रही है। जब तक अंतिम परिणाम नहीं आ जाता, तब तक हम उसे सहयोगी मानते रहेंगे। जो मुद्दे ममता ने उठाए हैं, उन पर सरकार चर्चा करेगी। जो नतीजा निकलेगा उसकी जानकारी दी जाएगी।

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