नई दिल्ली 25 मार्च. पांच बार की विश्व चैम्पियन एमसी मैरीकॉम और एल सरिता देवी ने रविवार को मंगोलिया के उलानबटोर में छठी एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किए जिससे भारत तालिका में दूसरे स्थान पर रहा.

मैरीकॉम ने मौजूदा विश्व चैम्पियन और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदकधारी चीन की रेन कांकान को 51 किग्रा वर्ग में 14-8 से और सरिता देवी ने 60 किग्रा वर्ग में ताजिकिस्तान की चोरिएवा मावजुना को 16-9 से परास्त किया. भारत दो स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक से चीन के बाद दूसरे स्थान पर उप विजेता रहा। चार अन्य भारतीय पिंकी जांगड़ा (48 किग्रा), सोनिया लाठेर (54 किग्रा), मोनिका सौन (69 किग्रा) और पूजा रानी (75 किग्रा) को फाइनल बाउट में अपनी प्रतिस्पर्धियों से हार मिली, जिससे उन्होंने रजत पदक अपनी झोली में डाले, पिंकी की मंगोलिया की बोलोरतुल तुमुरहुआग से 22-24, सोनिया को चीन की के जिया लियू से 8-14, मोनिका को चीन की डोंग मेई वांग 10-13 से और पूजा को मौजूदा विश्व चैम्पियन और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदकधारी चीन की जिंजी लि से हार मिली. पूजा ने इससे पहले एशियाई खेलों की स्वर्ण पदकधारी मंगोलिया की मुक्केबाज को परास्त किया था.

मंगोलिया 19 देशों की इस प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहा. भारतीय एमेच्योर मुक्केबाजी महासंघ के महासचिव पीके मुरलीधरन राजा ने कहा कि हमने सभी तीन ओलंपिक वर्गों में रजत और स्वर्ण पदक जीते हैं. भारतीय महिला मुक्केबाजों के लिए यह टूर्नामेंट काफी बेहतरीन साबित हुआ। 2001 में बैंकाक में शुरू हुए शुरुआती टूर्नामेंट से ही भारतीय महिलाओं का प्रदर्शन इसमें शानदार रहा है, यह टूर्नामेंट महिला मुकेबाजों के लिए पहले और एकमात्र ओलंपिक क्वालीफाईंग टूर्नामेंट की तैयारियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा. यह ओलंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट एआईबीए विश्व चैम्पियनशिप चीन में नौ से 20 मई तक आयोजित होगी.

शिवा को रजत

नई दिल्ली.  भारत के शिवा थापा (56 किग्रा) को अंतिम लम्हों में चेतावनी मिलने के कारण चेक गणराज्य के उस्ती नाद लाबेम में चल रही 43वीं पुरुष और महिला मुक्केबाजी ग्रां प्री में रजत पदक के साथ संतोष करना पड़ा. 

अगले महीने कजाखस्तान में होने वाले एशिया ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम में शामिल शिवा को अधिकतर समय बराबरी का मुकाबला होने के बावजूद इटली के विटोरिया जाहिन पारिनेलो के हाथों 7-10 से शिकस्त का सामना करना पड़ा. असम के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी को बाउट खत्म होने से 30 सेकेंड पहले झुकने के लिए दो अंक की पेनल्टी मिली जो अंत में निर्णायक साबित हुई. टीम के साथ मौजूद कोच जगदीप हुड्डा ने कहा कि पहले दो दौर में मुकाबला 2-2 और 4-4 से बराबर था लेकिन अंतिम तीन मिनट में उसे झुकने के लिए चेतावनी दी गई जिसके कारण संभवत उसे मुकाबला गंवाना पड़ा, यह काफी निराशाजनक था.इससे पहले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके विकास कृष्ण (69 किग्रा) को सेमीफाइनल में क्यूबा के डेसपेइन एरिसनोइड के हाथों 9-14 की शिकस्त के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था. भारत को इस तरह से इस प्रतियोगिता में दो पदक मिले.

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