मलेरिया से मौतों का सिलसिला जारी, नहीं चेत रहा प्रशासन

सीधी 9 नवम्बर . जिलेभर में मलेरिया एवं अज्ञात बीमारी का प्रकोप फैलने का खामियाजा लोगों को समय पर उपचार सुविधा न मिलने के कारण भुगतने की मजबूरी बनी हुई है.वर्तमान में चल रहे मलेरिया के प्रकोप में अभी तक करीब आधा सैकड़ा लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी.

मौसमी बीमारी का प्रकोप अक्सर ग्रामीण अंचलों में बरपने से डॉक्टरों की कमी को लेकर हमेशा हाय तौबा मचती है. बावजूद इसके जिलेभर में स्वीकृत डॉक्टरों के पद भरने को लेकर प्रशासन कभी भी संजीदा नहीं रहा. मालूम रहे कि जिले भर के  लोगों की सेहत का जिम्मा 37 डॉक्टरों के ऊपर है.इनमें 19 डॉक्टर तो केवल जिला अस्पताल में ही पदस्थ हैं.ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों के सेहत की देखभाल करने के लिये सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 18 डॉक्टरों की तैनाती है. शासन द्वारा स्वीकृत डॉक्टरों के 93 पद कई सालों से रिक्त पड़े हैं. डॉक्टरों की भारी कमी से ग्रामीण अंचलों में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उपचार की व्यवस्था काफी खस्ता है. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिहावल में तो स्थायी डॉक्टरों का पूरी तरह से टोटा होने से संविदा में नियुक्त दो डॉक्टरों को बागडोर सौंपी गयी है. ग्रामीण अंचलों में लगने वाले चिकित्सा शिविर के कारण जिला अस्पताल में पदस्थ 19 डॉक्टरों में से ज्यादा को वहां भी व्यस्त रहना पड़ता है. वर्तमान में मलेरिया का प्रकोप गंभीर रूप से बरपने के कारण चौफाल एवं पडऱी में लगे चिकित्सा शिविर में जिला से डॉक्टरों की ड्यूटी लगाये जाने से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को कई दिनों से डॉक्टरों की तलाश में भटकना पड़ रहा है. डॉक्टरों के न मिलने से मजबूरी में ग्रामीण अंचलों से आने वाले गरीब मरीजों को भी निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है.

मलेरिया से फिर हुई दो मौतें-

जिला अस्पताल के  चाइल्ड वार्ड में भर्ती कराये गये दो बच्चों को पीएफआर मलेरिया से गंभीर रूप से पीडि़त होने के कारण मंगलवार रात मौत हो गयी. ओम प्रकाश पिता बिहारी सिंह गोंड़ 12 वर्ष निवासी पडऱी की मौत रात करीब 8.30 बजे हुई और सुशीला पिता बंशबहोर साकेत 5 वर्ष निवासी बमुरी की मौत रात करीब 10 बजे हुई. उक्त दोनों बच्चों को जिला अस्पताल में मलेरिया से गंभीर हालत में पीडि़त होने पर भर्ती कराया गया था. पैथालॉजी जांच में दोनों मरीज पीएफआर से पीडि़त मिले. वार्ड में कुछ घण्टे के अंतराल से दो बच्चों की मौत के बाद अन्य परिजन भी काफी दहशत में हैं. चर्चा के दौरान कुछ परिजनों ने कहा कि मलेरिया पीडि़तों के चलते बच्चा वार्ड कई दिनों से काफी व्यस्त है. बिडम्बना यह है कि मरीज की हालत बिगडऩे पर कोई विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो पाते.

कहां कितने पद खाली

जिला स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार पूरे जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 51 पद स्वीकृत हैं. जिनमें केवल 11 ही कार्यरत हैं. द्वितीय श्रेणी चिकित्सकों के  स्वीकृत 79 पदों में से 26 ही कार्यरत हैं. जिला अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के स्वीकृत 25 पद में से 17 पद खाली हैं. इसी तरह द्वितीय श्रेणी डॉक्टरों के स्वीकृत 23 पद में से केवल 11 ही पदस्थ हैं. जिलेभर में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं. जिसमें रामपुर नैकिन में डॉक्टरों के स्वीकृत 5 पदों के  विरूद्घ 1 स्पेशलिस्ट तथा 2 द्वितीय श्रेणी डॉक्टर ही पदस्थ हैं. सिहावल की हालत और भी दयनीय है. यहां डॉक्टरों के स्वीकृत तीन पद में से सभी पद रिक्त होने से दो संविदा डॉक्टरों की तैनाती कर उपचार की व्यवस्था बनायी गयी है. मझौली में एक द्वितीय श्रेणी चिकित्सक तथा एक संविदा चिकित्सक की पदस्थापना की गयी है.

Related Posts: