नई दिल्ली. बीते वित्त वर्ष 2011-12 में देश के म्यूचुअल फंड उद्योगों की कुल परिसंपत्तियों में लगभग 5 प्रतिशत यानी 36,000 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

लगातार तीन तिमाहियों में म्यूचुअल फंड उद्योगों की परिसंपत्तियों में गिरावट आई। इस तरह 31 मार्च, 2012 को समाप्त वित्त वर्ष में म्यूचुअल फंड उद्योगों के प्रबंधन के तहत औसत परिसंपत्तियों [एयूएम] दो साल के निचले स्तर 6,64,824 करोड़ रुपये पर आ गई हैं। म्यूचुअल फंड उद्योगों के संगठन [एएमएफआई] द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड 89,879 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों के साथ देश का शीर्ष म्यूचुअल फंड बना हुआ है। रिलायंस एमएफ 78,112 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों के साथ दूसरे, आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल 68,718 करोड़ रुपये के साथ तीसरे, बिड़ला सनलाइफ 61,143 करोड़ रुपये के साथ चौथे और यूटीआई एमएफ 58,922 करोड़ रुपये के साथ पांचवें स्थान पर रहा।

जहां एचडीएफसी एमएफ देश का सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड है, वहीं रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट कंपनी [आरकैम] देश की सबसे बड़ी और सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली संपत्ति प्रबंधन कंपनी है। सरकार द्वारा प्रायोजित सार्वजनिक कोष, प्रतिबंधित खाते और हेज फंड को जोडऩे के बाद उसकी प्रबंधन के तहत कुल राशि 1,40,000 करोड़ रुपये बैठती है। वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान सभी 44 कोष घरानों के रिटेल फोलियो या निवेशक खातों में भी करीब 15 लाख की कमी आई। म्यूचुअल फंड उद्योग की परिसंपत्तियों घटकर जुलाई, 2010 के स्तर पर आ गई हैं। वहीं मई, 2010 के रिकार्ड स्तर से इनमें करीब 17 फीसद की गिरावट आई है।

शीर्ष पांच कोष घरानों में एचडीएफसी एमएफ, बिड़ला सनलाइफ एमएफ और यूटीआई एमएफ अंतिम तिमाही में अपने औसत संपत्ति प्रबंधन में इजाफा करने में सफल रहे हैं, वहीं रिलायंस एमएफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ के एयूएम में गिरावट आई है। आखिरी तिमाही में जिन अन्य म्यूचुअल फंड के एयूएम में कमी आई है उनमें फ्रैंकलिन टेम्पलेटन, डीएसपी ब्लैकरॉक, कोटक महिंद्रा, आईडीएफसी, टाटा, सुंदरम, डायचे, रेलिगेयर, फिडेलिटी, जेपी मॉर्गन, एलआईसी, आईडीबीआई, एचएसबीसी, बीएनपी परिबा, गोल्डमैन साक्स, बड़ौदा पायनियर, एलएंडटी, पियरलेस, टारस, मार्गन स्टेलने, प्रामेरिका, आईएनजी वैश्य, दाइवा, एआईजी ग्लोबल, एडलवेस और भारती एक्सा म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

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