एयर इंडिया जहां विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही है वहीं इसकी  दो महिला पायलटों ने 48 यात्रियों की जान बचाकर कंपनी की साख को बचाने का  कार्य किया है. भीषण हवाई हादसे को टालने में इनके अहम योगदान को  नहीं भुलाया जा सकेगा.

महिला पायलटों के साहस को सलाम..! एयर इंडिया एक ओर जहां पायलटों की बेमुद्दत हड़ताल से जूझ रही  है वहीं संकट के इस दौर में इसकी महिला पायलटों ने अपनी सतर्कता व सूझबूझ से विमान में सवार 48 यात्रियों की जिंदगी बचाकर निश्चित ही एक साहस भरा प्रशंसनीय कार्य किया है. विमान के ज्वलनशील र्इंधन को खत्म करने के लिए वे दो घंटे तक हवा में उड़ाती रहीं विमान. सिल्चर-गुवाहाटी जाने वाली एयर इंडिया के विमान ने उड़ान भरा ही था कि पायलट को पता चला विमान का अगला पहिया टूटकर अलग हो गया है. महिला पायलट अगर ज्वलनशील र्इंधन को खत्म नहीं करतीं तो विमान के हवाई अड्डे में उतरते ही आग लगने की संभावना थी. महिला पायलटों ने साहस का परिचय देते हुए विमान को दो घंटे तक गुवाहाटी के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास उड़ाती रहीं. इसके बाद आपात लैंडिंग के लिए तैयार हुर्इं. विमान को  सुरक्षित उतारने उनकी सूझबूझ की सभी यात्रियों ने प्रशंसा की. इसके बाद ही  यात्री विमान से सकुशल बाहर आये. यह पहला मौका नहीं है, इसके पूर्व भी  महिलाओं ने अनेक स्थानों पर अपने साहस का परिचय दिया है. रांची में एक  विधवा के साहसिक प्रयास से आतंक फैला रहे एक अपराधी को पकड़ लिया गया  था. मध्यप्रदेश के सिरमौर में महिलाओं ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते  हुए जंगल में लगी आग पर स्वयं ही काबू पा लिया था. पायलटों की बेमुद्दत हड़ताल के कारण एयर इंडिया की विमान सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं. हड़ताली पायलटों को मनाने के प्रयास असफल होने के बाद केन्द्रीय नागरिक  उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने पायलटों को बर्खास्त करने के संकेत दिये  हैं. पायलट गत मई माह से हड़ताल पर हैं. पायलट तनिक भी झुकने को  तैयार नहीं हैं. इसीलिए सरकार ने 101 पायलटों को पहले ही बर्खास्त  कर दिया था. सरकार ने पायलटों से साफ कह दिया है कि अगर वे काम पर  वापस नहीं लौटेंगे तो उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा. हड़ताल  से यात्रियों का भरोसा भी टूटा है. पायलट गिल्ड का कहना है कि सरकार समस्या को सुलझाने की बजाए समस्या से भाग रही है. मान्यता खो चुके इंडियन पायलट गिल्ड के अनुसार उनकी प्रमुख मांग 101 पायलटों की पुर्नाहाली है. इंडियन पायलट गिल्ड पूर्व की एयर इंडिया के पायलटों का प्रतिनिधित्व करती है. इससे सांद्ध पायलट 8 मई को उस कदम के खिलाफ हड़ताल पर चले गये थे जिसके तहत इंडियन एयर लाइन्स के पायलटों को जल्द ही बेड़े में शामिल होने वाले बोइंग-787 ड्रीम लाइनर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा था. सरकार ने पायलटों से धर्माधिकारी रिपोर्ट पर भी रजामंदी देने कहा था. लेकिन, पायलटों ने इस रिपोर्ट को गलत ठहराया है. कोर्ट ने हड़ताल को अवैध करार देकर झटका दिया है. हड़ताल के कारण एयर इंडिया की अंतर्राष्ट्रीय सेवा चरमरा गई है. वह अभी बमुश्किल 38 अंतर्राष्ट्रीय सेवायें संचालित कर रही है. महंगे र्इंधन से वैसे भी विमान कंपनियां संकट के दौर से गुजर रही हैं. सेंटर फॉर एशिया पेसिफिक एवियेशन के अनुसार भारतीय एयर लाइन्स कंपनियों को मार्च 2012 तक 2.5 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है. एयर इंडिया का घाटा 7 हजार करोड़  तक पहुंच चुका है. घाटे के अलावा इस पर 44000 करोड़ का कर्ज भी है.  एयर इंडिया जहां विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही है वहीं इसकी दो महिला पायलटों ने 48 यात्रियों की जान बचाकर कंपनी की साख को बचाने का कार्य किया है. भीषण हवाई हादसे को टालने में इनके अहम योगदान को नहीं भुलाया जा सकेगा. महिला पायलटों के साहस को सलाम!

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