भोपाल,22 नवंबर.नभासं. मध्यप्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वर्ष 2010 की स्थिति में लगभग 230 बाघ पाए गए हैं. वन मंत्री सरताज सिंह ने विधानसभा में डॉ. निशिथ पटेल के प्रश्न के लिखित उत्तर में ये जानकारी दी है.उन्होंने कहा कि कान्हा टाइगर रिजर्व में लगभग 60 पेंच में 65 पन्ना में तीन,सतपुडा में 43 और बांधवगढ में 59 बाघ इस दरमियान पाए गए हैं.

वन मंत्री ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के क्षेत्र में वर्ष 2006 में भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार 24 बाघ होने का पता चला. वर्ष 2007-08 में बाघों की गणना नहीं की गयी और वर्ष 2009 में बाघों की संख्या शून्य पायी गयी.हालाकि उन्होंने कहा कि इन वर्षों के दौरान पन्ना क्षेत्र में बाघ के शिकार का कोई प्रकरण सामने नहीं आया. सिंह ने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व एक बडा प्राकृतिक रहवास.स्थल है और इस क्षेत्र से उपरोक्त अवधि में बाघों के विलुप्त होने का कारण स्पष्ट नहीं है.उत्तर में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि बाघों के विलुप्त होने के संभावित कारणों में नर.मादा अनुपात में विकृति नर बाघों द्वारा शावकों का वध और विभिन्न कारणों से उनकी मृत्यु हो सकते हैं. वन मंत्री ने कहा कि हालाकि वर्ष 2010 में पन्ना टाइगर रिजर्व में एक बाघ ,चार बाघिन और छह शावक पाए गए हैं.उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघों के अचानक गायब होने की जांच कराने के लिए जांच कमेटी का गठन मई 2009 में किया और सितंबर 2010 में प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार जैविक कारणों असंतुलित लिंगानुपात और विघटित रहवास स्थल बाघों के विलुप्त होने के महत्वपूर्ण  कारण हैं.

Related Posts: