संसद में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा: कै ग का आकलन विवादास्पद

नई दिल्ली, 27 अगस्त. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोयला ब्लॉक आवंटन पर विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सोमवार को प्रश्नकाल के बाद लोकसभा और फिर राज्य सभा में अपना बयान दिया। उन्होंने कोयला आवंटन पर कैग के आकलन को विवादास्पद बताते हुए खारिज कर दिया। पीएम ने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।

सिंह ने संसद के दोनों सदनों में कैग रिपोर्ट पर अपनी ओर से दिए बयान में कहा, मैं माननीय सदस्यों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि रिपोर्ट में जिस अवधि का जिक्र है उस दौरान कुछ समय के लिए कोयला मंत्रालय का प्रभारी मंत्री होने के नाते मैं मंत्रालय के निर्णयों की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। मैं कहना चाहता हूं कि अनियमितताओं के जो भी आरोप लगाए गए हैं वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और सरासर बेबुनियाद हैं।

संसद स्थगित

दोपहर 12 बजे सदन की बैठक फिर से शुरू होते ही बीजेपी सदस्यों ने आसन के पास आकर भारी हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। ये सदस्य बयान नहीं इस्तीफा चाहिए और प्रधानमंत्री इस्तीफा दो के नारे लगा रहे थे। इसी हंगामे के बीच अध्यक्ष मीरा कुमार ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में बयान देने के लिए खड़े हुए। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्य सभा की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे और फिर मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

बीजेपी पड़ी अलग-थलग

संसद न चलने देने के मुद्दे पर बीजेपी अलग-थलग पड़ती जा रही है. अब तक हर मुद्दे पर बीजेपी के साथ खड़ा रहने वाले अकाली दल ने कहा कि इस मामले में सदन के भीतर चर्चा की जानी चाहिए.

एनडीए में पड़ी फूट

संसद की कार्यवाही न चलने देने को लेकर एनडीए में फूट पड़ गई है. अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा है कि सदन में इस पूरे मसले पर चर्चा की जानी चाहिए. ढींढसा के बयान के बाद सुबह 10 बजे होने जा रही एनडीए की बैठक टल गई, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी के नेताओं की बैठक हुई. इसमें राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज मौजूद रहे. बीजेपी के लिए राहत की बात यह है कि प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग पर शिवसेना उसके साथ है.

अकाली दल की राय सार्वजनिक रूप से आने के बाद भी बीजेपी ने साफ कर दिया है कि उसे प्रधानमंत्री के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है. इससे पहले जेडीयू अध्यक्ष और एनडीए के संयोजक शरद यादव भी निजी तौर पर खुद को चर्चा का पक्षधर बना चुके हैं, लेकिन मीडिया में मतभेद की बात सामने आने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि संसद की कार्यवाही के बहिष्कार को लेकर एनडीए एकजुट है.

हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी…

प्रधानमंत्री ने उनकी खामोशी पर तंज कसने वालों को शायराना अंदाज में जवाब देते हुए शेर पढ़ा हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी… इसके बाद उन्होंने कैग के निष्कर्ष को खारिज करते हुए विपक्ष से आह्वान किया कि वह संसद में बहस चलने दे, ताकि लोगों को इस मामले पर जवाब मिल सके. उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे मुख्य विपक्षी दल भाजपा को भी आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संप्रग का शासन आने पर कोयला ब्लाकों का आवंटन प्रतिस्पर्धी बोली से करने का प्रस्ताव हुआ था लेकिन विपक्षी दलों के तत्कालीन शासन वाले छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया अपनाने का पुरजोर विरोध किया था.

उन्होंने कहा कि राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अप्रैल 2005 में उन्हें लिखे पत्र में प्रतिस्पर्धी बोली का विरोध करते हुए कहा था कि यह सरकारिया आयोग की सिफारिशों की भावना के विपरीत होगा. सिंह ने कहा कि इसी प्रकार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने जून 2005 में भेजे पत्र में मौजूदा नीति जारी रखने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा कि इसी तरह तत्कालीन वाम मोर्चा शासित पश्चिम बंगाल और बीजद भाजपा शासित ओडिशा सरकारों ने भी प्रतिस्पर्धी बोली पद्धति का औपचारिक विरोध करते हुए उन्हें पत्र लिखे थे.
सिंह के मुताबिक विपक्ष शासित राज्यों का कहना था कि प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए कोयला ब्लाक आवंटन से कोयले की कीमत बढ़ेगी जिससे उनके क्षेत्रों में उद्योगों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और पट्टेधारी का चयन करने संबंधी उनके विशेषाधिकार भी कम होंगे. प्रधानमंत्री ने कैग के अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में लोकतंत्र में इस बात को स्वीकार करना कठिन है कि नीति में बदलाव को लागू करने के लिए सरकार के कानूनी सुधार संबंधी किसी निर्णय पर लेखा परीक्षा में प्रतिकूल टिप्पणी की जाए.

कांग्रेस के खाते में गया कोल ब्लॉक का पैसा

कोल ब्लॉक आवंटन पर सियासी तकरार जारी है. अब भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा है कि यदि जीडीपी ग्रोथ और बिजली बढ़ाने के लिए कोल ब्लॉक का अधिक आवंटन किया गया तो फिर विकास कहां हुआ?  लोकसभा और राज्यसभा की नेता सुषमा स्वराज व अरूण जेटली ने कोल आवंटन को लेकर बनाई गई सरकारी नीति पर सवाल उठाए. सुषमा स्वराज ने कहा कि कोल ब्लॉक आवंटन का मुनाफा कांग्रेस के खाते में गया.

यदि इसकी निष्पक्ष जांच की जाए तो यूपीए सरकार के साथ-साथ कांग्रेस भी कठघरे में होगी. राजस्व नुकसान के लिए साफ तौर पर प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान आवंटित किए गए सभी कोल ब्लॉक आवंटन को रद करने की मांग की. वहीं अरूण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिम्मेदारी लेने की बात कही लेकिन दोष दूसरे पर मढ़ दिया. सच तो यह है कि कोल ब्लॉक बांटने से कोई विकास नहीं हुआ. बस एक कोयला नीति बनाने में कई साल लगा दिया गया. यह सरासर आम लोगों के साथ धोखा है. इससे पहले कोयला ब्लॉक आवंटन में 1.86 लाख करोड़ रुपये नुकसान पर विपक्ष ने संसद में हंगामा जारी रखा.

दोषियों पर होगी कार्रवाई

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा है कि 57 कोयला ब्लाकों के आवंटन की समीक्षा की जा रही है और गलत जानकारी देने की दोषी पायी जाने वाली कंपनी और अधिकारियों के विरद्ध कडी कार्रवाई की जायेगी. 09 में दूसरी बार संप्रग सरकार बनने के बाद ही कोयला ब्लाकों के आवंटन की समीक्षा का काम शुरु कर दिया गया था तथा 26 ब्लाकों का आवंटन रद्द किया गया.

तथा कई मामले में नोटिस जारी किया गया.  इस समय 57 ब्लाकों के आवंटन की जांच चल रही है. बहुत सी कंपनियों के मामले सामने आ रहे हैं और आवंटन रद्द भी किये जा सकते हैं लेकिन इस बारे में वह जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कह सकेंगे. श्री जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गलत जानकारी देने वाली कंपनियों के साथ साथ उस जानकारी की सही ढंग से जांच नहीं करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जायेगी. कोयला मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान के बाद मामला पूरी तरह साफ हो गया है. सभी आवंटन राज्य सरकारों की सिफारिश पर किये गये तथा कोयला खानों वाले राज्यों के कडे विरोध के चलते कोयला ब्लाकों का आवंटन नीलामी के जरिये करने की प्रक्रिया शुरु नहीं की जा सकी. उन्होंने कहा कि विपक्ष को संसद में इस मसले पर चर्चा में हिस्सा लेना चाहिये जिससे जनता को सही सही चीजों का पता चल सके.

पीएम ने दी अधूरी जानकारी : रमन

डा. रमन सिंह ने पीएमके छग के बारे में आज दिए व्यक्तत्व को अधूरा करार देते हुए आरोप लगाया कि  मामले में पूरी जानकारी नहीं दी. 11 मई 2005 में राज्य सरकार ने  उस समय प्रचलित नीति को जारी रखने के  साथ ही सुझाव भी दिया था कि राज्य खनिज विकास निगम को पर्याप्त संख्या में कोल ब्लाक आवंटित किए जाय जिससे संयुक्त उपक्रम बनाकर उसे विकसित करने के लिए कम्पनियों से वह अनुबंध कर सके.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उस सुझाव का तो उल्लेख किया जो उन्हें राजनीतिक रूप से उपयुक्त लग रहा था लेकिन विकल्प के बहुत ही महत्वपूर्ण अंश का जिक्र तक नही किया. उन्होंने राज्य सरकार के पत्र के उस बिन्दु का भी जिक्र नही किया जिसमें कोल ब्लाक को नीलामी के जरिए आवंटित किए जाने की स्थिति में नीलामी से होने वाली आय का एक हिस्सा उस राज्य को भी दिया जाय जिसमें कोल ब्लाक स्थित है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मई 05 में कोयला मंत्री तथा जून 05 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि कोल ब्लाक आवंटन नीति में अचानक बदलाव से राज्य की निर्माणाधीन स्टील. आयरन तथा कैप्टिव पावर परियोजनाओं पर विपरीत प्रभाव पडेगा. प्रधानमंत्री ने पत्र के केवल इस अंश का ही उल्लेख किया.

जीरो लास का इस्तेमाल नहीं

कोयला ब्लाक आवंटन में जीरो लॉस को लेकर मचे बवाल पर केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने आज सफाई देते हुये कहा कि उन्होंने तथा उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों में से किसी ने भी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है. इसके बावजूद कुछ समाचार पत्रों में यह गलत ढंग से प्रकाशित किया गया है कि सरकार ने कोयला ब्लाकों के आवंटन में कुछ भी नुकसान नहीं होने. जीरो लॉस.. का दावा किया है.

श्री चिदम्बरम ने कहा कि उन्होंने यह कहा था कि यदि कोयला निकाला नहीं जाता और वह जमीन के अंदर ही रहता है तो नुकसान कैसे हुआ. नुकसान की बात तभी उठती है जब जमीन से एक टन कोयला निकाला जाता है और उसे अस्वीकार्य मूल्य पर बेच दिया जाता है. एक संवाददाता ने पूछा था कि क्या वह ब्लाक आवंटन में जीरो लास होने का दावा कर रहे हैं तो उन्होंने कहा था वह अपनी बात उनके नाम पर कहने की कोशिश कर रहा है. मैने कहा था कि नफा नुकसान की बात तब उठती है जब 57 ब्लाक से वास्तव में कोयला निकाला गया हो. यदि कोयला का खनन नहीं किया गया तो नफा नुकसान का सवाल नहीं उठता.

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