नई दिल्ली, 19 अक्टूबर. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भ्रष्टाचार के कारण जेल गए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वी एस येदुरप्पा के संदर्भ में जो बयान दिया है उसको लेकर भाजपा के अंदर ही खलबली मच गई है.

हालांकि पार्टी नेता भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की बात को आगे बढ़ाकर श्री आडवाणी के बयान से ध्यान भटकाना चाह रहे हैं. लेकिन बावजूद इसके दिल्ली की राजनीतिक गलीयारों में चर्चा हो रही है कि क्या पार्टी के कुछ लोग जानबुझकर येदुरप्पा का बचाव कर रहे थे. उल्लेखनीय है कि श्री आडवाणी ने पिछले दिनों भ्रष्टाचार के मुद्दे पर न सिर्फ येदुरप्पा से दूरी बना ली थी बल्कि कहा था कि वे इस प्रकार की घटना से शर्मिंदा भी है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी येदुरप्पा को बार-बार चेतावनी दी थी. हालांकि श्री आडवाणी द्वारा चेतावनी देने की बात के संबंध में भाजपाई नेता बोलने को तैयार नहीं है.

लेकिन प्रेक्षक इस शब्द को गंभीर मानते हुए इसके विश्लेषण करने में लग गए हैं. प्रेक्षक  मान रहे हैं कि श्री आडवाणी के बयान से यह प्रतीत हो रहा है कि पार्टी को कर्नाटक में हो रही घटनाओं या अनियमितताओं के बारे में पहले से जानकारी थी. यदि यह सच है तो सवाल यह उठता है कि पार्टी आखिरी वक्त तक क्यों इंतजार करती रही? इतना ही नहीं सवाल यह भी उठता है कि क्या पार्टी को कर्नाटक के रेड्डी बंधुओं के कारनामों के बारे में भी जानकारी थी? यदि हां, तो भाजपा भ्रष्टाचार के मसले पर लगातार दोहरी नीति को क्यों अपना रही थी. इसी तरह सवाल यह भी उठ रहा है कि तमाम जानकारी के बाद भी पार्टी सिर्फ चेतावनी तक सीमित क्यों रही? क्या येदुरप्पा व रेड्डी बंधुओं को बचाने में पार्टी का कोई अन्य समूह लगा हुआ था? प्रेक्षक मान रहे हैं श्री आडवाणी के बयान से उक्त सवालों का जन्म हुआ है लिहाजा पार्टी को इसपर सफाई देनी चाहिए. लेकिन इस संबंध में पुछे गए सवाल पर भाजपा के नेता सिर्फ भ्रष्टïाचार के खिलाफ पार्टी की जीरो टोलरेंस की नीति की दुहाई देकर पल्ला झाड़ रहे हैं.

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