नई दिल्ली, 18 जुलाई. राष्ट्रपति चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरू हुए शक्ति प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती हैं. इसीलिए उन्होंने अपने संप्रग के कुनबे को जोड़े रखने के लिए बुधवार को संप्रग के सभी दलों के नेताओं को दोपहर के भोजन पर भी आमंत्रित किया.

इससे पूर्व मंगलवार को उन्होंने क्रास वोटिंग की गुंजाइश खत्म करने के लिए कांग्रेस के सभी राज्यों के सांसदों की क्लास ली. सांसदों के लिए इस स्पेशल सेशन का आयोजन सोनिया गांधी के आवास 10, जनपथ पर किया गया था, जहां उन्होंने सांसदों को जरूरी हिदायतें ताकीद कीं. वैसे, राष्ट्रपति चुनाव में आंकड़ों का गणित पहले से ही संप्रग प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी के पक्ष में था. मगर अब ममता बनर्जी ने भी प्रणब के पक्ष में वोटिंग का एलान कर कांग्रेस को बड़ी राहत दी है. राष्ट्रपति चुनाव को कांग्रेस के खिलाफ बन रहे सियासी ध्रुवीकरण की दिशा में मोडऩे की भाजपाई कोशिशें ममता के ऐलान के बाद पूरी तरह ही धराशायी हो गई हैं.

हालांकि, कांग्रेस फिर भी इस दफा राष्ट्रपति चुनाव में कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ रही. इसका अंदाजा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सक्रियता से भी लगाया जा सकता है.
उन्होंने विभिन्न राज्यों के कांग्रेसी सांसदों को जिस अंदाज में समझाया, वह काबिलेगौर रहा. उन्होंने विभिन्न प्रदेशों के सांसदों से टुकड़ों में मुलाकात की और सबको समझाया कि राष्ट्रपति चुनाव में सभी सिर्फ पहली वरीयता वाले खाने में ही निशान लगाएं. साथ ही यह भी ताकीद की कि यदि मतपत्र में नाम थोड़ा ऊपर नीचे हो या किसी प्रकार की अशुद्धि हो तो वे दोबारा मतपत्र ले सकते हैं. सोनिया से मिलने गए सांसदों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदान प्रक्रिया की एक-एक बारीकी से सभी को अवगत कराया.

इतना ही नहीं, उनका सबसे ज्यादा जोर इसी बात पर था कि एक भी वोट खराब नहीं होना चाहिए और सभी वोट डालने पहुंचें. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों या फिर प्रदेश अध्यक्षों व विभिन्न विधानसभाओं में विधानमंडल दल के नेताओं से कांग्रेस अध्यक्ष पहले ही बैठक कर उन्हें एक-एक वोट की कीमत समझा चुकी हैं. सरकार के मंत्रियों की उपेक्षा से नाराज बरेली के सांसद प्रवीण ऐरन ने राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा के लिए बुलाई गई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बैठक का बहिष्कार कर दिया. बार-बार ताकीद के बावजूद संगठन के लोगों को सरकार के मंत्रियों की तरफ से समय न मिलने पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए ऐरन 10, जनपथ की बैठक में नहीं गए. ऐरन का आरोप है कि कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम समेत तमाम मंत्री कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देशों के बावजूद उनकी नहीं सुनते.

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