शीतकालीन सत्र में भी पेश नहीं हो पाएगा

भोपाल,14 नवम्बर.नभासं. राज्य सरकार की ओर से डेढ़ साल पहले बना जन सुरक्षा अधिनियम संभवत:शीतकालीन सत्र में भी पेश नहीं हो पाएगा. इस कानून के बारे में अभी तक विधि और विधायी तथा नगरीय प्रशासन विभाग की राय नहीं आ पाई है. इस कानून से सरकार सुरक्षा पर होने वाले खर्च को कम करने का प्रयास कर रही है.इसके आने के बाद व्यवसायिक व निजी संस्थानों को सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने होंगे.

राज्य के पुलिस मुख्यालय और आतंक निरोधी दस्ते ने दो साल पहले इसको लेकर लंबी कवायद की थी. राज्य में सिमी के नेटवर्क की परतें खुलने और प्रदेश के इंदौर, भोपाल जैसे शहर आतंकियों के निशाने पर होने की सूचना के बाद ये कवायद हुई थी. सरकार ने जन सुरक्षा अधिनियम तैयार कराया था. इसका पूरा मसौदा डेढ़ साल पहले ही मंत्रालय आ चुका है, लेकिन मामला गृह विभाग से आगे ही नहीं बढ़ा. इसमें नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य और विधि विभाग को भी राय देना है, लेकिन किसी भी विभाग ने इसमें अपनी राय अब तक नहीं दी है. ये है जन सुरक्षा अधिनियम – अधिनियम में जनता को सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के काफी सारे उपाय किए गए हैं. इस कानून के लागू होने पर कोई भी मकान मालिक अपने किराएदार की सूचना पुलिस को देने के लिए बाध्य होगा. ऐसा ही हॉस्टल, पेइंग गेस्ट के मामले में होगा.

यूनिवर्सिटी, कॉलेज भी इसमें शामिल होंगे.  किसी भी व्यावसायिक भवन, मॉल, शापिंग कांपलेक्स, सिनेमा हाल, नर्सिग होम, अस्पताल आदि के निर्माण में सुरक्षा के निश्चित मापदंड अपनाए जाएंगे. क्लोज सर्किट कैमरे के अलावा, चेकिंग द्वार, इमरजेंसी गेट, निगरानी पोस्ट आदि की इसमें अनिवार्यता की गई है. ऐसा ही प्रावधान कालोनाइजरों के लिए भी है. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार आदि में भी सुरक्षा के अनेक मापदंड इसमें सुझाए गए हैं.  बैंकों, एटीएम काउंटरों, वित्तीय लेनदेन वाले अन्य संस्थानों, पेट्रोल पंपों और सर्राफा बाजार में भी निजी तौर पर सुरक्षा के उपाय इसमें सुझाए गए हैं. इन्हें नहीं मानने वालों के लिए दंड का प्रावधान भी है. इसलिए नहीं कार्रवाई – भोपाल और जबलपुर में पकड़े गए इंडियन मुजाहिदीन के खूंखार आतंकी शहर के बीचों-बीच रह रहे थे. आतंक निरोधी दस्ता इन्हें किराए पर मकान देने वालों पर इसलिए कार्रवाई नहीं कर पाया क्योंकि जन सुरक्षा अधिनियम लागू नहीं था. यदि कलेक्टर धारा 144 लागू रखते थे, तो मकान मालिकों पर कार्रवाई करके एटीएस ऐसे लोगों को सबक दे सकता था. अभी समय- गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि ये अधिनियम बनकर तो तैयार है.सिर्फ अन्य विभागों से राय आने में हो रही देरी से अटका है. इस कानून को जल्द लागू कराने के लिए प्रयास कर रहे है.

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