नई दिल्ली. दक्षिण चीन सागर में गतिविधियां बंद करने की भारत को चेतावनी देने के बाद चीन अब भारत के साथ रक्षा संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के इरादे से रक्षा वार्ता का अगला दौर यहां 8 और 9 दिसंबर को करेगा।

इसके पहले अगले सप्ताह दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता भी होगी। रक्षा वार्ता में आपसी हितों और परस्पर चिंता के सभी मसलों पर राय का खुलकर आदान-प्रदान होगा। रक्षा वार्ता का पिछला दौर जनवरी, 2010 में हुआ था लेकिन पिछले साल अगस्त में चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए नत्थी वीजा जारी करने की नीति लागू करने के बाद भारत ने विरोध में सभी रक्षा संबंध स्थगित कर दिए थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच सर्वोच्च स्तर पर बातचीत के बाद यह मसला सुलझाया गया और अब भारत रक्षा वार्ता के अगले दौर के लिए तैयार हुआ है। रक्षा वार्ता के लिए चीन की जनमुक्ति सेना (पीएलए) के डिपुटी चीफ जनरल मा थ्येन एक उच्चस्तरीय रक्षा व सैन्य शिष्टमंडल लेकर भारत आएंगे। उनकी यहां रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा और अन्य आला अधिकारियों के साथ गहन बातचीत होगी। बातचीत का मुख्य मसला आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना होगा। इसके अलावा प्रतिविद्रोही गतिविधियों में भी एक-दूसरे के साथ सहयोग शुरू करने के मसले पर बातचीत होगी। इस वार्ता के दौरान दोनों देश साझा थलसैनिक अभ्यास का सिलसिला फिर शुरू करने का फैसला करेंगे। दोनों देशों की थलसेनाओं के बीच 2007 और 2008 में एक-दूसरे के यहां हाथ में हाथ नामक साझा अभ्यास आयोजित किया गया था। रक्षा वार्ता के पहले दोनों देशों के बीच सीमा मसले पर बातचीत के लिए दोनों देशों के पीएम के विशेष प्रतिनिधियों की भी यहां 28 और 29 नवंबर को बातचीत होगी। इस वार्ता के लिए चीन के स्टेट काउंसिलर ताई पिंग क्वो आला अधिकारियोंके साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से बातचीत के लिए भारत आएंगे।

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