इस साल अब तक हुई मॉनसूनी बारिश छह वर्षों में सबसे अधिक है। इसके बावजूद खरीफ सीजन में कृषि उत्पादन की वृद्धि दर घटने की संभावना है। इसके नतीजतन इस साल यानी 2011-12 में वर्षभर कृषि उपजों की कीमतें ऊंची बनी रहने का अनुमान है।

रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स के हालिया अध्ययन में कहा गया है कि अक्टूबर से शुरू होने वाले चालू खरीफ सीजन में कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में कृषि उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 3-4 फीसदी रहने का अनुमान है। पिछले साल कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 6.6 फीसदी रही थी।

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि चावल और गेहूं समेत प्रमुख कृषि फसलों के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद दलहनों और तिलहनों जैसी जिंसों के उत्पादन में मामूली गिरावट से मुद्रास्फीति पर असर पड़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। खरीफ  उत्पादन का योगदान कुल खाद्यान्न उत्पादन में आधा, तिलहन उत्पादन में दो-तिहाई और नकदी फसलों जैसे गन्ना और फाइबर में 100 फीसदी होता है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, इस सीजन में बारिश छह वर्षों में सबसे अच्छी रही है। मॉनसून के लिहाज से देश को बांटे गए 36 इलाकों में से 32 में बारिश सामान्य से अधिक रही है, जबकि बाकी चार इलाकों में बारिश मामूली कम रही है। इस साल मॉनसून सीजन के पहले तीन महीनों में अब तक 716 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो 2005 के बाद सबसे अधिक और 2007 के समान है। वर्ष 2007 में 715 मिमी बारिश दर्ज की गई है। पिछले मानकों के आधार पर इस सीजन में कुल बारिश 920-930 मिमी अनुमानित है।

ऐंजल ब्रोकिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निश्चित रूप से अच्छी बारिश का कुल कृषि उत्पादन पर सकारात्मक असर होगा, लेकिन कुल उत्पादन पिछले साल से कम रहेगा। 2010-11 के दौरान कुल अनाज उत्पादन 2415.6 लाख टन रहा था। गेहूं और दालों का उत्पादन क्रमश: 859.3 लाख टन और 180.9 लाख टन के साथ अब तक के सर्वोच्च स्तर पर रहा। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए चौथे अग्रिम अनुमानों के मुताबिक इस साल गेहूं का उत्पादन में 51.3 लाख टन बढ़ोतरी की संभावना है। वहीं दालों के उत्पादन में 34.3 लाख टन बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। चने, उड़द और और मूंग का उत्पादन बढ़कर क्रमश: 82.5, 17.4 और 18.2 लाख टन होने का अनुमान है।

चावल का उत्पादन 953.2 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले साल 890.9 लाख टन दर्ज किया गया था। 2011-12 में इसका लक्ष्य 1020 लाख टन रखा गया है। वर्ष 2009-10 में कुल खाद्यान्न उत्पादन (रबी और खरीफ) 2181.1 लाख टन रहा था। हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन 2008-09 में 2344.7 लाख टन रहा था।

मूंगफली जैसी तिलहनों की कुछ किस्मों और दालों के उत्पादन में भारी गिरावट आने की संभावना है, जिनकी पूर्णतया भरपाई चावल जैसी जिंसों से नहीं हो सकेगी वहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोतरी के कारण इस साल वर्षभर कृषि जिंसों की कीमतों में तेजी बनी रहेगी।

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