लखनऊ, 18 अप्रैल. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनता से सीधे रूबरू होने के लिए और उनकी समस्याओं को जानने के लिए जनता दरबार जैसा सराहनीय कदम उठाया है. अखिलेश यादव के जनता दरबार में अलग-अलग जिलों से सैकड़ों लोग अपनी-अपनी फरियाद लेकर पहुंचे हैं.भीड़ को संभालना प्रशासन के लिए भी मुश्किल हो रहा है.

अखिलेश का यह पहला जनता दरबार है जिसे जनता दर्शन का नाम दिया गया है. जनता दरबार 5 कालीदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री के निवास स्थान पर आयोजित किया गया है. जनता दरबार का वक्त सुबह 9 बजे से 11 बजे तक के लिए निर्धारित किया गया है जो कि हर बुधवार को आम जनता के लिए खोला जाएगा. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अखिलेश ने पहले संवाददाता सम्मेलन में जनता दरबार शुरू करने की बात कही थी. पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ने सरकारी आवास में प्रवेश करने के बाद लगातार तीन दिन आम लोगों की समस्याएं सुनीं थीं. वहीं सपा के पूर्व नेता व राष्ट्रीय लोकमंच के संरक्षक अमर सिंह ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जनता दरबार की जमकर सराहना की है.

अमर सिंह ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री परिसर को आम लोगों के लिए खोलकर अच्छी पहल की है. अमर ने कहा कि मायावती के नेतृत्व में राज्य की पूर्ववर्ती बहुजन समाज पार्टी सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय आम लोगों के लिए बंद कर दिया था. जिससे सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद नहीं रह गया था. उन्होंने कहा कि मायावती ने अपने कार्यकाल में लोगों से दूरी बना ली थी, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. लेकिन अब अखिलेश के नेतृत्व में सपा की सरकार ने मुख्यमंत्री कार्यालय एवं परिसर को आम लोगों के लिए खोलकर अच्छी पहल की है. अमर ने कहा कि अखिलेश युवा हैं और समय के साथ उन्हें राजनीति में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा

जनता दरबार में अफरा-तफरी

यादव द्वारा पांच साल बाद शुरू किए गए जनता दरबार में आज अफरा-तफरी मचने की खबर है. हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव द्वारा शुरू किए गए पहले जनता दरबार में आज फरियादियों की भारी भीड़ पहुंची. पांच वर्ष बाद शुरू हुए मुख्यमंत्री के जनता दरबार कार्यक्रम में अपनी समस्याओं को लेकर लोग तड़के ही पहुंचना शुरू हो गए. बसपा सुप्रीमो मायावती ने वर्ष 2007 में अपने कार्यकाल के दौरान जनता दरबार बंद कर दिया था. पहला दिन होने के कारण आज फरियादियों को काफी उम्मीदें थी. फरियादियों में शारीरिक रूप से अक्षम गरीब और अमीर तो थे ही इनके साथ कुछ लोग पुलिस के सताये थे तो कुछ अफसरशाही से परेशान.

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