सिद्दीकी और उपाध्याय पर कार्रवाई न होने से खफा लोकायुक्त

लखनऊ, 22 मई. मायावती सरकार के कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और रामवीर उपाध्याय के खिलाफ सिफारिशों पर कार्रवाई न होने से खफा लोकायुक्त का कहना है कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए अखिलेश सरकार जल्दी में नहीं दिखाई दे रही है. पहले की सिफारिशों पर कोई कार्रवाई न होने से अन्य पूर्व मंत्रियों के खिलाफ चल रही जांच भी धीमी पड़ गई है.

लोकायुक्त संगठन के सूत्रों का कहना है कि पिछली सरकार में जहां लोकायुक्त की ज्यादातर सिफारिशों पर आनन-फानन में अमल किया गया वहीं मौजूदा सरकार सिफारिशों पर अमल को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर नहीं दिखाई दे रही है. यही वजह है कि जिन लोकसेवकों के खिलाफ जांच लंबित है, उनकी जांच धीमी पड़ गई है. लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए जल्दी में नहीं दिखाई दे रही है. उनकी रिपोर्ट पर क्या हुआ, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई है. इतना नहीं उन्हें पता चला है कि उनकी रिपोर्ट को लेकर न्यायालय में केस भी दायर किए गए हैं लेकिन सरकार की तरफ से इसकी भी कोई जानकारी नहीं दी गई है. इसके पीछे क्या वजह है वह खुद नहीं समझ पा रहे हैं.

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतों की जांच के बाद लोकायुक्त ने सरकार से पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी व रामवीर उपाध्याय और उनके परिजनों के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की है. नसीमुद्दीन के खिलाफ पहले भेजी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई करने से तत्कालीन मायावती सरकार केइनकार कर देने के बाद लोकायुक्त ने नई सरकार बनने के बाद फिर से अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री अखिलेश को दी थी.

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