राष्ट्रीय उद्यानों को अलर्ट रहने का दिया था फरमान बावजूद चालू है वन प्राणियों का शिकार

भोपाल,24 मई,नभासं. पारदियों द्वारा बाघों की हत्या की सुपारी लेने की सूचना मिलते ही वन विभाग प्रधिकरण ने गत दिनों देश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद भी वन विभाग को एक भी शिकारी हाथ नहीं लगा. जबकि हाल ही में राजधानी भोपाल में हिरण व मोर के अवशेष मिले थे. शिकारियों को पकडऩे के लिए एक टीम भी बनाई गई लेकिन महीनों बीतने के हैं अब शिकारियों का पता नहीं चल पाया.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय बाघ सरंक्षण प्राधिकरण को मुखबिरों ने सूचना दी थी कि पादरियों ने बाघों के शिकार करने के लिए सुपारी ली है. यह जानकारी प्राधिकरण ने देश के सभी राज्यों को दे दी और अलर्ट जारी करने के निर्देश दिए. महाराष्ट्र के ताडोबा टाइगर रिजर्व में बाघ की शिकार के बाद इस बात की पुष्टि हो गई. वहीं इस सूचना की जानकारी मिलते ही मप्र वन विभाग ने भी सभी नेशनल पार्कों और अभयारण्य में 15 जून तक अलर्ट रहने के निर्देश दिए है.

महाराष्ट्र के चंद्रपुर के ताडोबा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में विगत 26 अप्रैल को बाघ के शिकार की घटना के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण मप्र सहित सभी राज्यों में नजर रखे हुए है. गौरतलब है कि विगत वर्ष 2011 के दौरान ही देश में कुल 26 बाघों की मौत हुई थी, जिसमें से 14 बाघों की मौत शिकारियों द्वारा की गई है. इस संबंध में पीसीसीएफ वन्य प्राणी पीके शुक्ला ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा दी गई सूचना के बाद प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व और अभयारण्य में भी अलर्ट घोषित किया गया है. उन्होंने बताया कि मध्श्प्रदेश में इस समय 257 बाघ हैं.

अभी तक जिन बाघों की मौत हुई है वो अैरिटोरियल फाइट की वजह से हुई है. शुक्ला ने बताया कि वनअधिकारी बाघ ही नहीं बल्कि तेंदुओं की भी सुरक्षा पर नजर रखे हुए हैं. क्योंकि बाघ के बाद शिकारियों की नजर तेंदुए पर होती है.शुक्ला ने बताया कि राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य प्राणियों का शिकार रोकने मुखबिरों की सहायता भी ली जाएगी. इसके लिए अधिकारियों को दिशानिर्देश दे दिए गए हैं.

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