• चीन की चेतावनी, समुद्र में दिखाएगा ताकत

बीजिंग, 24 नवंबर.  दुनिया के दो सुपरपॉवर अमेरिका और चीन के संबंधों में और कड़वाहट घुलती जा रही है. चीन ने एक ओर प्रशांत महासागर में युद्धाभ्यास का ऐलान किया है तो दूसरी ओर उसने अमेरिका पर दक्षिण चीन सागर में बेवजह दखल देने का आरोप लगाया है.

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने विवादित दक्षिण चीन सागर में ष्बाहरी देशोंष् की दखल का कड़ा विरोध किया है. खनिज संसाधनों से भरपूर इस इलाके पर चीन अपनी संप्रभुता का दावा करता रहा है जबकि कई पड़ोसी देश भी इस हिस्से पर अपना हक जताते हैं. चीन के मुताबिक अमेरिका बेवजह इस मामले में दखल दे रहा है. चीन के अखबार पीपुल्स डेली के मुताबिक बाली में आसियान सम्मेलन में ओबामा ने जानबूझकर दक्षिण चीन सागर का मुद्दा उठाया. अमेरिका चाहता है कि इस मसले को लेकर चीन का इसके पड़ोसी देशों से तकरार हो जबकि इन देशों की 20 साल पुरानी दोस्ती और मजबूत होने की ओर बढ़ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के ऑस्ट्रेलिया सहित प्रशांत महासागर में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के अभियान के हफ्ते भर बाद ही चीन ने ऐलान कर दिया कि वह प्रशांत महासागर में युद्धाभ्यास करेगा.

चीन के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, चीन की नौसेना इस महीने के आखिर में पश्चिमी प्रशांत महासागर में युद्धाभ्यास करेगी. हालांकि चीन ने इसे नियमित युद्धाभ्यास करार दिया है जो वार्षिक योजना के तहत किया जाता है. इसका दावा है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियम.कानूनों के दायरे में है और किसी खास देश को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि ओबामा पिछले हफ्ते प्रशांत महासागर के देशों के सात दिनों के दौरे पर थे. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने इस दौरे के वक्त इस प्रशांत महासागर के इलाके में सैन्य मौजूदगी और बढ़ाने पर जोर दिया. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ओबामा ने एक नए करार पर दस्तखत किए जिसके तहत अगले साल ऑस्ट्रेलिया में अमेरिकी नौसैनिकों का प्रशिक्षण शुरू होगा. अमेरिका इस इलाके में 2016 तक अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 2500 करने जा रहा है.  हालांकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की इस दोस्ती का चीन ने भी कड़ा जवाब दिया है. चीन ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया में अमेरिकी सेना की मौजूदगी ठीक नहीं है और इसकी बड़े पैमाने पर समीक्षा की जानी चाहिए. अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को नए चीनी प्रक्षेपास्त्रों से खतरा हैए ऐसा पहले कभी नहीं था लेकिन चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से अमेरिका चिंतित है और किसी भी संभावित खतरे के लिए खुद को तैयार कर रहा है.

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